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एक पहल

Uneducated Jummi : 14 साल का संघर्ष, बेटी को ऐसे बनाया जेईएन

Uneducated Jummi

Uneducated Jummi ने 14 साल तक आर्थिक संघर्ष करते हुए अपनी बेटी शबनम को पढ़ा-लिखाकर जेईएन बनाया है। इस दौरान लोगों के खूब ताने सुने और सहे भी। एक बेटा और पति को खोने के बाद भी Uneducated Jummi ने हिम्मत नहीं हारी और उसकी मेहनत रंग लाई। Uneducated Jummi अब राजस्थान के मेवात में महिला सशक्तीकरण की मिसाल बनी है तो बालिका शिक्षा के बदलते हालातों की सशक्त उदाहरण भी है। 

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Uneducated Jummi की बेटी शबनम फैला रही मेवात में शिक्षा की रोशनी

खैरथल/अलवर (राजस्थान)। मैं अनपढ़ हूं, जिसका मुझे मलाल है। यह मुझे आज भी कचोटता है, लेकिन मैं बेटी को पढ़ा पाई, यह मेरे लिए गर्व की बात है। ऐसा गांव मिर्जापुर की 50 वर्षीय अनपढ़ जुम्मी (Uneducated Jummi) ने पॉजिटिव कनेक्ट को बताया।

Uneducated Jummi बताती है, मेरी बेटी सरकारी नौकरी पाकर अपने पैरों पर खड़ी है तो अब वे भी मेरे साथ खड़े नजर आते हैं, जो कभी बेटी को पढ़ाते समय ताने भी मारते रहते थे।

करीब 550 परिवारों की आबादी वाला यह मिर्जापुर गांव नया जिला बने खैरथल-तिजारा के किशनगढ़बास ब्लॉक में आता है, जो पहले अलवर जिले का ही हिस्सा होता था। अलवर से मिर्जापुर करीब 55 किलोमीटर दूर है तो किशनगढ़बास से गांव की दूरी 19 किलोमीटर है।

गांव में नहीं था पढ़ाई का माहौल 

पॉजिटिव कनेक्ट से बातचीत में अनपढ़ जुम्मी (Uneducated Jummi) बताती है कि गांव में पढ़ाई का माहौल ही नहीं था। पहले बेटियों को पढ़ाना तो दूर लोग बेटों को ही स्कूल भेजने से परहेज करते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं है।

अनपढ़ लोग जताने लगे ऐतराज

Uneducated Jummi बताती है, मैंने बेटी को पढ़ाने की ठानी तो गांव-बस्ती में अनपढ़ लोग ऐतराज जताने लगे। तरह-तरह ही बात बनाते थे, लेकिन मैंने किसी की नहीं सुनी। 

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समझा और अमल भी किया

Uneducated Jummi पॉजिटिव कनेक्ट को बताती हैं कि एक बार अलवर मेवात शिक्षा एवं विकास संस्थान (AMIED) के मैम्बर सचिव नूर मोहम्मद ने गांव में सर्वे कराया और बेटियों को पढ़ाने के लिए गांव वालों को समझाने का प्रयास किया। लोगों ने उनकी बात को सुना तो सही, लेकिन समझा नहीं।

मैंने ना केवल समझा, अमल भी किया

Uneducated Jummi बताती हैं, मैंने उनकी बात को ना केवल समझा, बल्कि उस पर अमल भी किया। उनके सहयोग से बेटी शबनम को सर्व शिक्षा अभियान के तहत ब्रिज कोर्स से 5वीं कक्षा की पढ़ाई कराई और उसका सरकारी स्कूल में दाखिला कराया।

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लोगों की दुआएं पाकर मिलता सुकून

Uneducated Jummi की बेटी JEn बन चुकी शबनम पॉजिटिव कनेक्ट को बताती हैं कि 10वीं तक पढ़ाई मैंने गांव में ही की। उसके बाद मैंने इलैक्ट्रोनिक्स में डिप्लोमा किया। चूंकि इलैक्ट्रोनिक्स में स्कोप ज्यादा नहीं था तो फिर मैंने सिविल में डिप्लोमा किया। इसके बाद वर्ष 2018 में मैंने बीटेक किया।

मैं अब अलवर जिले की रामगढ़ पंचायत समिति में जूनियर इंजीनियर के पद पर कार्यरत हूं। खुद के पैरों पर खड़े संबंधी सवाल के जवाब में पॉजिटिव कनेक्ट को Uneducated Jummi की बेटी शबनम बताती हैं कि अब बहुत अच्छा महसूस होता है और सिर पर हाथ रखकर लोग दुआएं देते हैं तो मुझे सुकून भी महसूस होता है।

मैंने और मां ने नहीं हारी हिम्मत 

पॉजिटिव कनेक्ट से चर्चा में जेईएन शबनम बताती हैं, वर्ष 2013 में हुए एक एक्सीडेंट में भाई चल बसा तो वर्ष 2017 में ब्लड कैंसर के कारण पिता फेज मोहम्मद (फेजू) का इंतकाल हो गया, लेकिन मैंने और मेरी मां Uneducated Jummi ने हिम्मत नहीं हारी।

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समय के साथ आने लगा बदलाव

उन दिनों को याद करके भावुक हुई शबनम कहती है कि अगर मां (Uneducated Jummi) हिम्मत हार गई होती तो आज मैं यहां तक नहीं पहुंच पाती। मां जुम्मी उन दिनों में भी मेरा हौंसला बढ़ाती रहती और कहती थी कि खुदा को जो मंजूर था, वह हो गया। अब आगे अपने लक्ष्य पर ध्यान दे बेटी।

चर्चा को आगे बढ़ाते हुए जेईएन शबनम पॉजिटिव कनेक्ट को बताती है कि जिन संकटों को सामना मैंने और मां (Uneducated Jummi) ने किया है, ऐसा किसी और बहन-बेटी को नहीं सहना पड़े। वह कहती हैं कि अब समय बदल गया है। मुस्लिम समुदाय में भी लोग बालिकाओं को पढ़ाने के लिए आगे आने लगे हैं।

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बालिकाओं को करती हूं प्रेरित

Uneducated Jummi की बेटी जेईएन सबनम बताती हैं,  मेरी सफलता के पीछे अलवर मेवात शिक्षा एवं विकास संस्थान के नूर मोहम्मद का बड़ा योगदान है। एक सवाल के जवाब में वे कहती हैं कि जब भी मौका मिलता है मैं अलवर मेवात शिक्षा एवं विकास संस्थान के कार्यक्रमों में शामिल होती हूं।

अन्य बहनों को भी पढऩे के लिए प्रेरित करती हूं, क्योंकि बिना शिक्षा के कुछ कर पाना मुश्किल है। वे बताती हैं कि फील्ड डयूटी के दौरान जिस गांव में जाना होता है, वहां भी समय मिलने पर बालिका शिक्षा के लिए ग्रामीणों को जागरूक करने का प्रयास जरूर करती हूं।

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मेवात पढ़ेगा तभी आगे बढ़ेगा

अलवर मेवात शिक्षा एवं विकास संस्थान (AMIED) के सदस्य सचिव नूर मोहम्मद बताते हैं कि पिछले दो दशक के दौरान में मेवात में शिक्षा के प्रति लोगों का नजरिया बदला है। मुस्लिम समुदाय में लोग अब दीनी तालीम के साथ औपचारिक शिक्षा पर भी ध्यान देने लगे हैं।

वे बताते हैं कि संस्थान के जरिए हमारी टीम भी मेवात में बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने का सतत प्रयास कर रही है। हमारा मानना है कि मेवात पढ़ेगा, तभी आगे बढ़ेगा।

बेटी के आगे बढऩे से ज्यादा और खुशी क्या

वे बताते हैं कि ऐसी कई बालिकाएं हैं, जिनको पढ़ाने का सौभाग्य हमें मिला और आज वे आत्मनिर्भर बनी हैं। एक सवाल के प्रतिउत्तर में वे पॉजिटिव कनेक्ट को बताते हैं कि बेटी के पढकऱ आगे बढऩे से ज्यादा खुशी और क्या हो सकती है?

नूर मोहम्मत गर्व करते हुए पॉजिटिव कनेक्ट को बताते हैं कि Uneducated Jummi की बेटी शबनम अपने किशनगढ़बास ब्लॉक से मुस्लिम समुदाय की पहली और एकमात्र जेईएन है, जिस पर समाज को भी नाज है।

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साकार किया बालपन का सपना

अलवर मेवात शिक्षा एवं विकास संस्थान (AMIED) में शुरूआत से जुड़ी डिप्टी डायरेक्टर आशा नारंग पॉजिटिव कनेक्ट को बताती हैं कि आर्थिक मजबूरियों के कारण कई बार शबनम की मां Uneducated Jummi की आंखें नम हो जाती थी, लेकिन दोनों मां-बेटी हिम्मत की धनी हैं।

वे बताती हैं कि Uneducated Jummi की बेटी शबनम जब छोटी थी तो बकरियां भी चराती थी। वह जब 7वीं-8वीं में पढऩे लगी तो किसी के भी पूछने पर वह सिर्फ यही कहती कि उसे इंजीनियर बनना है, जबकि इंजीनियर क्या होता है यह वह जानती तक नहीं थी, लेकिन ज्यों-ज्यों समझदार हुई तो उसने अपने बालपन के सपने को साकार करने की ठान ली और आज जेईएन बनकर वह सपना पूरा करके दिखा भी दिया।

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