By – हितेश भारद्वाज
20 December 2024
Teamwork से राजस्थान के अलवर जिले में भजेड़ा गांव का सरकारी स्कूल भवन तीन साल में आकर्षक बन गया है, जो अब सबको लुभाता है। यह प्रेरक कहानी है प्रधानाचार्य व शिक्षकों के Teamwork की।
Teamwork की मिसाल है भजेड़ा का सरकारी स्कूल
नौगांवा (अलवर)। राजस्थान के भजेड़ा गांव का राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय Teamwork की ऐसी मिसाल पेश कर रहा है, जो साबित करता है कि इंसान मन से कुछ करने की ठान ले तो कोई काम मुश्किल नहीं होता। काम के प्रति लगन और इमानदारी के साथ की गई मेहनत से संसाधनों के अभाव में भी कर्मभूमि की दशा और दिशा को बदला जा सकता है।
भजेड़ा गांव अलवर तहसील में आता है और अलवर से गांव की दूरी करीब 22 किलोमीटर है, लेकिन शिक्षा विभाग में यह स्कूल नए बने खैरथल-तिजारा जिले में शामिल हो गया है।
अंग्रेजी माध्यम के निजी स्कूलों को दे रहा मात
हिन्दी माध्यम का यह सरकारी स्कूल अंग्रेजी माध्यम के निजी स्कूलों को भी मात दे रहा है। शिक्षा में ही नहीं, अब खेल व विज्ञान गतिविधियों में भी बच्चे गांव और स्कूल का नाम रोशन कर रहे हैं।
यह सब संभव हो सका प्रधानाचार्य डॉ. कोमल कांत शर्मा और शिक्षकों की Teamwork से। स्कूल भवन अब दूर से ही लोगों को आकर्षित करता है। यहां के बच्चे अब सामान्य अंग्रेजी बोलने व समझने लगे हैं। शिक्षाप्रद संदेश भी अंग्रेजी में बोल लेते हैं।
Teamwork से खेलों में भी दे रहे बेहतर परिणाम
भजेडा सीनियर स्कूल के प्रधानाचार्य डॉ. शर्मा पॉजिटिव कनेक्ट को बताते है कि स्कूली बच्चे न केवल पढ़ाई में बल्कि Teamwork से खेलों में भी बेहतर परिणाम दे रहे हैं। दो वर्ष से बोर्ड कक्षाओं का परीक्षा परिणाम शत-प्रतिशत रहा है। इसके अलावा विद्यालय की शतरंज, वॉलीबॉल और बाँक्सिंग की टीम कई बार राज्य स्तर पर खेल चुकी है।
नामांकन में भी हुई बढ़ोतरी
इस बार Teamwork से ही शूटिंग के खिलाड़ी भी तैयार किए जा रहे हैं। बच्चों को विज्ञान मॉडल बनाना सिखाया गया। इससे छात्र-छात्रा राज्य स्तर पर चयनित हो चुके है। यहां के विद्यार्थी टाई, बेल्ट व पहचान-पत्र के साथ पूरे गणवेश में अनुशासित नजर आते हैं। स्कूल में नामांकन में भी बढ़ोतरी हुई है।
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इन भामाशाहों का रहा सहयोग
पॉजिटिव कनेक्ट से बातचीत में प्रधानाचार्य डॉ. शर्मा बताते हैं कि मैं स्कूल में आया, तब यहां का भवन जर्जर अवस्था में था। भवन की दशा सुधारने की दिशा में चिंतन कर प्रस्ताव तैयार किया। इसके लिए Teamwork के जरिए भामाशाहोंं और ग्रामीणों का भी सहयोग लिया।
डॉ. शर्मा पॉजिटिव कनेक्ट को बताते हैं कि मौजेक इंडिया ने 65 लाख रुपए खर्च किए और काम कार्यकारी एजेंसी के रूप में सहगल फाउण्डेशन ने किया। Teamwork से इस राशि से स्कूल भवन की मरम्मत, उसका रंग-रोगन, दीवारों पर शिक्षाप्रद स्लोगन लेखन, बिजली, पानी, पौधरोपण, शौचालय, फर्नीचर, रेन वाटर हार्वेस्टिंग जैसे काम हुए।
2 भामाशाहोंं ने कराया कमरों का निर्माण
Teamwork के प्रयासों से बच्चोंं के लिए खेलकूद की सामग्री स्कूल ग्रांट और ग्रामीणों के सहयोग से की गई। भामाशाह घनश्याम दास जसौरिया और हेतराम गुर्जर ने कमरों का निर्माण कराया। शिक्षकों ने डेढ़ लाख और ग्रामीणों ने 2 लाख रुपए का सहयोग दिया।
आगुंतकों को लुभाता चन्द्रयान
Teamwork के प्रयासों की चर्चा करते हुए पॉजिटिव कनेक्ट को प्रधानाचार्य डॉ. शर्मा बताते हैं कि बच्चों में विज्ञान के प्रति दिलचस्पी पैदा करने के लिए स्कूल में चन्द्रयान (GSL) बनवाया गया, जो बच्चों ही नहीं, आगुंतकों को भी लुभाता है। इतना ही नहीं स्कूल में इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध कराई गई और डिजिटल लाइब्रेरी का निर्माण कराया।
Teamwork के प्रयासों से स्कूल में स्मार्ट टीवी, स्मार्ट बोर्ड के साथ ही प्रोजेक्टर भी उपलब्ध है। एक कमरे में आर्ट एण्ड क्राफ्ट की व्यवस्था भी है, जहां बच्चे पेंटिंग व चार्ट बनाने के साथ ही कबाड़ से जुगाड़ बनाना सीखते हैं।
ऐसे हैं प्रिंसिपल डॉ. शर्मा
मूलत: दौसा जिले के महवा उपखण्ड के बड़ा गांव खेरला निवासी डॉ. कोमल कांत शर्मा वर्ष 2021 से भजेडा सीनियर स्कूल में प्रधानाचार्य के पद पर कार्यरत हैं।
कला और विज्ञान में दिलचस्पी रखने वाले डॉ. शर्मा ने मत्स्य जनपद क्षेत्र की कला एवं पुरातत्व विषय पर शोध किया, जिसे पुस्तक रूप में जवाहर कला केंद्र जयपुर के सहयोग से प्रकाशित किया है। एमए राजस्थान विश्वविद्यालय से मेरिट में द्वितीय स्थान के साथ प्राचीन भारतीय कला, प्राचीन विज्ञान एवं पुराभिलेख शास्त्र में किया।
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से वर्ष 2000 में कनिष्ठ शोध वृत्ति तथा वरिष्ठ शोध वृत्ति प्राप्त की। स्नातक स्तर पर चित्रकला में राजस्थान कॉलेज से वर्ष 1998 में ब्रॉन्ज मैडल हासिल किया। इसी दौरान एनसीसी सर्टिफिकेट वनराज आम्र्ड स्क्वाड जयपुर से प्राप्त किया।
वर्ष 2006 में व्याख्याता इतिहास के पद पर सेवाएं शुरू की। वर्ष 2012 में कनिष्ठ वाणिज्यिक कर अधिकारी के रूप में नियुक्ति मिली, लेकिन वहां मन नहीं रमा तो तीन माह सर्विस करने के बाद नौकरी छोड़ दी। वर्ष 2013 में जिला उद्योग अधिकारी का पद पर चयन हुआ।
इसी दौरान भारतीय पुरातत्व विभाग में सहायक पुरातत्व वेत्ता के पद पर चयनित हुए। वर्ष 2016 से प्रधानाचार्य के रूप में शिक्षा विभाग में सेवा दे रहे हैं। वर्ष 2022, 2023 में भामाशाह प्रेरक सम्मान तथा 2023 में राज्य सरकार से राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान मिला।
