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एक पहल

Sampoorna Shiksha : 5 प्रोजेक्टों से बाल विकास की वाहक

Sampoorna Shiksha

Sampoorna Shiksha NGO अपने 5 प्रोजेक्टों से करौली (राजस्थान) में वंचित बच्चों के जीवन को बेहतर बना रही है, जो बाल विकास की वाहक व बदलाव की पहल है। सम्पूर्ण शिक्षा करौली की पाठशालाओं में शिक्षकों को गतिविधि आधारित शिक्षण का प्रशिक्षण दे रही है। राजस्थान के अन्य क्षेत्रों में भी वंचित बच्चों का जीवन संवारने पर विचार कर रही है।

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शिक्षकों को Sampoorna Shiksha का प्रशिक्षण

करौली (राजस्थान)। सम्पूर्ण शिक्षा (Sampoorna Shiksha) से अब राजस्थान के वंचित बच्चों का भी जीवन रोशन हो सकेगा। इसके तहत करौली जिले में गतिविधि आधारित शिक्षण (Activity Based Teaching) के लिए शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। जल्द ही अन्य क्षेत्रों में संचालित पाठशालाओं में कार्यरत शिक्षकों को Sampoorna Shiksha की ट्रेनिंग दी जाएगी। बच्चों के लिए जरूरी संसाधन भी उपलब्ध कराए जाएंगे।

Sampoorna Shiksha की फाउण्डर लता श्रीनिवासन पॉजिटिव कनेक्ट को बताती हैं, सबसे पहले साउथ इंडियन एज्युकेशन सोसायटी (SIES) की वेद पाठशाला के 10 छात्रों को ऑफलाइन 10वीं कक्षा की तैयारी कराई, जिनका परिणाम अच्छा रहा। इससे हमारा उत्साह बढ़ा। तब, नई दिल्ली के प्रगति व्हील्स स्कूल के 50 बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाया गया, जिनका भी परिणाम बेहतर रहा।

यह कोरोना से पहले की बात है। तब हमने 3 साल तक ऐसा किया, लेकिन कोरोना में ऑफलाइन काम बंद हो गया, तब मैंने बहन पुष्पा सुब्रमण्यम के साथ मिलकर सम्पूर्ण शिक्षा का गठन किया, जिससे बाद में वैदेही पगरिया को जोड़ा।

अंतराल पाटने और सृजन के लिए कर रही काम 

अब हम तीनों मिलकर नवीन व प्रभावशाली पहलों के माध्यम से शैक्षिक अंतराल को पाटने और सृजन के लिए काम कर रही हैं, जिसके उत्साहजनक परिणाम सामने आ रहे हैं। सीखने के परिवर्तनकारी अवसरों से सम्पूर्ण शिक्षा को 1000 वॉलियंटर और 5 बिजनेस स्कूलों के 500 इंटर्न का सहयोग भी मिल रहा है।

पॉजिटिव कनेक्ट से बातचीत में Sampoorna Shiksha NGO की फाउंडर लता श्रीनिवासन बताती हैं कि इस बदलाव का समर्थन करने के लिए हम देश-दुनिया में 5 प्रोजेक्टों पर काम करते हैं, जो सुदूर और वंचित क्षेत्रों के बच्चों की विविध आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए बनाए गए हैं।

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सम्पूर्ण शिक्षा के 5 प्रोजेक्ट

किताब-खिलौना : किताबों और खिलौनों वाली लाइब्रेरी बनाई जाती है, जो सीखने को मजेदार, आसान और अधिक प्रभावी बनाती है।

प्रोजेक्ट ई-स्मार्ट शिक्षा किट: परस्पर संवाद और आधुनिक शिक्षण सहायक सामग्री शामिल की जाती है।

इंग्लिश-ऑन-कॉल: शिक्षण के साथ बोलचाल में अंग्रेजी के प्रयोग से आत्मविश्वास बढ़ाने का प्रयास किया जाता है।

कम्प्यूटर लैब : कौशल वृद्धि के लिए कंप्यूटर लाइब्रेरी की स्थापना की जाती है।

एसएस अकेडमी: राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी 2020) के अनुसार शिक्षकों का नवीनतम शिक्षा शास्त्र पर ध्यान केंद्रित करने और उनमें व्यावसायिक विकास को बढ़ावा देने का प्रयास किया जाता है।

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मिला प्योर इंडिया सोशल इम्पैक्ट अवार्ड 2022

सम्पूर्ण शिक्षा की फाउण्डर पुष्पा सुब्रमण्यम पॉजिटिव कनेक्ट को बताती हैं कि Sampoorna Shiksha को शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने के लिए प्योर इंडिया ट्रस्ट ने प्योर सोशल इम्पैक्ट अवार्ड 2022 प्रदान किया। इसमें देशभर की 156 NGO शामिल हुई, जिसमें सम्पूर्ण शिक्षा को दूसरा स्थान मिला।

वे बताती हैं कि सम्पूर्ण शिक्षा को उसके समर्पण और प्रभावकारी बदलाव के कारण पिछले वर्षों में कई अन्य सम्मान भी मिले।

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शिक्षकों को 8 माह का प्रशिक्षण

शिक्षा को सुलभ बनाने के लिए प्रतिबद्ध Sampoorna Shiksha की फाउण्डर पुष्पा सुब्रमण्यम बताती हैं कि हम फिलहाल गतिविधि आधारित शिक्षण के लिए शिक्षकों को प्रशिक्षित कर रहे हैं। राजस्थान के करौली में रेखा पाठशाला में प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया है और कई अन्य पाठशालाओं के शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण की अवधि करीब 8 माह की होती है।

शिक्षक को भेजने होते हैं फोटो व वीडियो

वे बताती हैं कि हमारी टीम सप्ताह में एक बार ट्रेनिंग देती है और फिर शिक्षक उसे सप्ताहभर क्लास में क्रियान्वित करता है। शिक्षक को इससे जुड़े फोटो व वीडियो Sampoorna Shiksha NGO को भेजने होते हैं, जिससे यह पता लगाया जाता है कि जो सिखाया है, शिक्षक उसे सही से अमल कर भी रहा है या नहीं।

अन्य जिलों में भी ट्रेनिंग देने पर विचार

इसी तरह की ट्रेनिंग राजस्थान के अन्य जिलों में भी संचालित पाठशालाओं के शिक्षकों को देने पर विचार चल रहा है। ट्रेनिंग के बाद उन पाठशालाओं में बच्चों को सम्पूर्ण शिक्षा मिल सके, इस पर काम किया जा सकेगा।

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Sampoorna Shiksha एक नजर में

सम्पूर्ण शिक्षा फिलहाल देश के 20 राज्यों के साथ दुनिया के 3 अन्य देश यूएसए, यूएईसिंगापुर में भी काम कर रही है। Sampoorna Shiksha NGO 3 हजार से ज्यादा बच्चों को लाभान्वित कर चुकी है। संस्था शहरी व ग्रामीण क्षेत्र के 25 स्कूलों में भी काम कर रही है।

इन राज्यों में Sampoorna Shiksha

* राजस्थान                      * झारखण्ड
* लेह                               * उत्तराखण्ड
* बिहार                            * उत्तरप्रदेश
* असम                            * महाराष्ट्र
* कर्नाटक                        * आंध्र प्रदेश
* तमिलनाडु                     * तेलंगाना
* केरल                             * दिल्ली
* अरुणाचल प्रदेश             * त्रिपुरा
* पश्चिम बंगाल                 * मध्यप्रदेश
* जम्मू                            * कश्मीर

100 से ज्यादा टीचर्स को ट्रेनिंग

Sampoorna Shiksha NGO की ओर से एसएस अकेडमी टीचर ट्रेनिंग के जरिए 4 राज्यों के 10 स्कूल व सामुदायिक पाठशालाओं के 100 से अधिक टीचरों को ट्रेनिंग दी है। इससे 2 हजार से ज्यादा बच्चों को सम्पूर्ण शिक्षा का लाभ मिला है। 50 से अधिक पाठ्यसामग्री की किटों का वितरण किया जा चुका है।

ये हुआ बदलाव

Sampoorna Shiksha की गतिविधियों से 8 ग्रामीण व 2 शहरी स्कूलों में भी बदलाव आया है। उनमें बच्चों की उपस्थिति 60 फीसदी बढ़ी है तो 2 हजार बच्चे व 100 से अधिक टीचर प्रभावित हुए हैं। इन स्कूलों में पढ़ाई का फ्रेंडली माहौल भी बना है।

डिजिटल शिक्षा में बढ़ोतरी

Sampoorna Shiksha के डिजिटल इंटरवेशन से 17 पिछड़े स्कूलों में 50 फीसदी डिजिटल शिक्षा में बढ़ोतरी हुई है, जहां हर माह 30 घंटे पढ़ाई हो रही है।

अंग्रेजी की स्किल बढ़ी

Sampoorna Shiksha के इंग्लिस ऑन कॉल के जरिए 12 राज्यों के 5 हजार से अधिक बच्चे लाभान्वित हुए हैं। इससे 40 फीसदी ने अंग्रेजी सीखने में दिलचस्पी दिखाई तो 20 फीसदी में अंग्रेजी की स्किल बढ़ी है। इनमें 30 फीसदी देहाती बच्चे व 70 फीसदी शहरी बच्चे हैं।

पहुंच व क्षेत्र ऐसे बढ़ा

Sampoorna Shiksha को 40 से अधिक संगठनों का सहयोग मिला है। इससे बच्चों तक पहुंचने में 35 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है तो क्षेत्र का दायरा भी 25 फीसदी बढ़ा है।

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