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एक पहल

Pink Yam Farming से आप ऐसे कमा सकते हो 2 लाख रुपए बीघा

Pink Yam Farming

दक्षिण भारत का सुपरफूड पिंक रतालू अब राजस्थान के भरतपुर में भी होने लगा है। भरतपुर जिले के बेहनेरा निवासी प्रगतिशील किसान भीम सिंह राणा पिंक रतालू की खेती (Pink Yam Farming) कर रहे हैं। ऐसा करने वाले वे भरतपुर जिले के पहले किसान हैं। भरतपुर की माटी में पौष्टिक फसल पिंक रतालू को उगाने से भीमसिंह को अच्छा मुनाफा होने की उम्मीद है। इससे 2 लाख रुपए बीघा तक कमाया जा सकता है।

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दक्षिण भारत के सुपरफूड Pink Yam Farming भरतपुर में भी

भरतपुर (राजस्थान)। दक्षिण भारत का सुपरफूड पिंक रतालू अब राजस्थान के भरतपुर में भी होने लगा है। भरतपुर जिले के बेहनेरा निवासी प्रगतिशील किसान भीम सिंह राणा पिंक रतालू की खेती (Pink Yam Farming) कर रहे हैं।

विश्व प्रसिद्ध केवलादेव राष्ट्रीय पक्षी उद्यान में नैचर गाइड भीम सिंह राणा, भरतपुर जिले के पहले किसान हैं, जिन्होंने इस पौष्टिक फसल को स्थानीय मिट्टी में उगाया है। उन्हें अब इससे अच्छा मुनाफा होने की उम्मीद है। भीम सिंह अगली बार पिंक रतालू की खेती (Pink Yam Farming) का विस्तार भी करेंगे।

कोरोना में ऐसे आया आइडिया

किसान भीम सिंह राणा ने पॉजिटिव कनेक्ट को बताया कि पिंक रतालू की खेती (Pink Yam Farming) का आइडिया कोरोना में आया।

लॉकडाउन में यूट्यूब पर खेती से जुड़ी नई तकनीकों और फसलों से जुड़े कई वीडियो देखे। इसी दौरान राजसमंद जिले के बामन बामनियां कलां गांव के किसानों की पिंक रतालू की खेती (Pink Yam Farming) से जुड़ी वीडियो दिखी। उस वीडियो से समझ आया कि पिंक रतालू स्वादिष्ट और पौष्टिक तो है ही, किसानों के लिए लाभकारी भी है।

पॉजिटिव कनेक्ट को भीम सिंह बताते हैं कि मैंने तभी तय किया कि इसे उगाकर देखूंगा। पिंक रतालू शरीर के लिए वरदान है तो किसान की आय बढ़ाने का फायदेमंद सौदा भी है।

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जैविक पद्धति से उगाया पिंक रतालू

Pink Yam Farming करने वाले भरतपुर जिले के पहले किसान भीम सिंह राणा चर्चा के दौरान पॉजिटिव कनेक्ट को बताते हैं कि मैंने इसे पूरी तरह जैविक पद्धति से उगाया है। इसमें किसी भी तरह का रासायनिक खाद या दवा नहीं डाली। केवल देसी खाद, वर्मी कंपोस्ट और प्राकृतिक तत्वों का उपयोग किया है।

राजसमंद से मंगाया का बीज

Pink Yam Farming के लिए पिंक रतालू का बीज मैंने राजसमंद से 5000 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से मंगाया और एक बीघा के पांचवे हिस्से पर इसकी खेती शुरू की।

जोखिम व लागत दोनों कम

राणा का कहना है कि Pink Yam Farming की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें किसी भी प्रकार का रोग या कीट नहीं लगता, इसलिए यह कम जोखिम और कम लागत वाली फसल है।

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खेती के लिए ऐसा करना जरूरी

पॉजिटिव कनेक्ट से बातचीत में किसान भीमसिंह बताते हैं कि Pink Yam Farming में बेल 10 से 20 फीट तक लंबी होती है। इसके लिए बेल चढ़ाने का स्ट्रक्चर बनाना जरूरी होता है।

बांस उपलब्ध नहीं हो तो ढेंचा की लकड़ी से भी स्ट्रक्चर बना सकते हैं। Pink Yam Farming में बेल को ऊपर चढ़ाना जरूरी है ताकि कंद मोटा और स्वस्थ हो। कंद का वजन 1.5 से 2 किलो तक होता है, जबकि कुछ कंद 5 किलो तक पहुंच जाते हैं। एक किलो बीज से (काट काट कर) 5 से 6 पौधे लगाए जा सकते हैं।

किसानों को आर्थिक फायदा

किसान भीम सिंह बताते हैं, Pink Yam Farming  के लिए एक बीघा भूमि में पिंक रतालू का 5 क्विंटल बीज लगता है और उससे 30 क्विंटल तक पैदावार मिल जाती है। इसका बाजार भाव किसानों के लिए 50 से 100 रुपए प्रति किलो रहता है, जबकि उपभोक्ता इसे 100 से 150 रुपए किलो में खरीदते हैं।

एक बीघा में 2 लाख तक की कमाई

Pink Yam Farming जैविक तरीके से की जाए तो किसान को एक बीघा से लगभग 2.5 लाख रुपए की आमदनी हो सकती है। खर्च निकालकर करीब 2 लाख का शुद्ध मुनाफा कमाया जा सकता है।

Pink Yam Farming

दो बार करते हैं खुदाई

चर्चा के दौरान किसान भीम सिंह ने पॉजिटिव कनेक्ट को बताया कि Pink Yam Farming में फसल की खुदाई दो बार की जाती है। नवंबर में, जब इसे सब्जी के रूप में बेचना हो और फरवरी में, जब बीज तैयार करना हो। मैं इस साल अपनी फसल का एक हिस्सा बीज के रूप में रखूंगा ताकि अगले सीजन में इसे बढ़ा सकूं।

अब करेंगे खेती का विस्तार

अगली बार मैं पिंक रतालू की खेती एक एकड़ (ढाई बीघा) जमीन में करूंगा और इस तरह Pink Yam Farming को विस्तार देकर खुद ही बीज भी तैयार करूंगा। पॉजिटिव कनेक्ट को किसान भीमसिंह ने बताया।

मेरा लक्ष्य है कि भरतपुर में जैविक रतालू की पहचान बने। आने वाले समय में अन्य किसानों को भी बीज उपलब्ध कराऊंगा और जरूरतमंद किसानों की मदद भी करूंगा।

मानव स्वास्थ्य के लिए लाभदायक

पिंक याम, बेलदार कंद फसल है। Pink Yam Farming दक्षिण भारत के अलावा राजस्थान के राजसमंद और उदयपुर जैसे इलाकों में बड़े पैमाने पर की जाती है। रतालू में विटामिन सी, विटामिन बी, पोटेशियम, मैग्नीशियम, और फाइबर जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं।

यह हृदय के लिए अच्छा है। कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित रखता है। वजन घटाने में मदद करता है और डायबिटीज के मरीजों के लिए तो वरदान से कम नहीं। महिलाओं में हार्मोनल बैलेंस बनाए रखने में भी इसे मददगार माना जाता है।

भोजन का डायनामाइट

Pink Yam Farming करने वाले किसान भीम सिंह पिंक रतालू को भोजन का डायनामाइट भी कहते हैं। इस तरह भरतपुर की उपजाऊ धरती अब केवल गेहूं, सरसों या बाजरे तक सीमित नहीं, यहां अब सेहत और समृद्धि दोनों की फसल लहलहा रही है।

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