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Okra Cultivation से राजस्थान के इस गांव को मिली नई पहचान

Okra Cultivation

Okra Cultivation से राजस्थान में भरतपुर जिले के ठेई गांव को नई पहचान मिली है। ग्रामीण इसे भिंडी गांव कहने लगे हैं। यहां के किसान गोविन्द की सफल प्रेरक कहानी…

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Okra Cultivation से किसान गोविन्द ऐसे बना करोड़पति

भरतपुर (राजस्थान)। Okra Cultivation ने पूर्वी राजस्थान के एक गांव को ऐसी पहचान दिलाई कि आसपास के गांवों में आम बोलचाल में ग्रामीण इसे भिंडी वाला गांव या भिंडी गांव बोलने लगे हैं।

यहां करीब 600-700 बीघा जमीन में भिंडी की पैदावार हो रही है। इस गांव का एक किसान Okra Cultivation से करोड़पति बन गया तो उसने अन्य किसानों को भी प्रेरित किया।

इस गांव की जनसंख्या लगभग ढाई हजार और घरों की संख्या लगभग 800 है। यहां अब कोई ऐसा घर-परिवार नहीं है, जो Okra Cultivation ना करता हो। यह गांव भरतपुर जिला मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर दूर उत्तरप्रदेश सीमा से लगा है, जो ऊंदरा ग्राम पंचायत में आता है। इस गांव का असली नाम ठेई है, जिसे लोग अब भिंडी गांव भी कहने लगे हैं।

ऐसे आया Okra Cultivation का आइडिया

भिंडी की खेती से सालाना 2 करोड़ तक कमाने वाले ठेई गांव (Bhindi Gaon) के 37 वर्षीय किसान गोविन्द सिंह पॉजिटिव कनेक्ट को बताते हैं, इसकी शुरुआत 2005 में हुई थी। उनके मामा ने पिता रणवीर सिंह से Okra Cultivation करने के लिए 12 बीघा खेत 10 हजार प्रति बीघा के हिसाब से किराए पर लिया। उस समय हम गेहूं, बाजरा और तिल की खेती करते थे। इससे मामा ने मात्र 6 माह में 15 लाख रुपए कमाए और बाइक, ट्रैक्टर खरीदने के साथ ही घर भी बना लिया।

पहली बार में 12 बीघा पर की खेती

बातचीत में पॉजिटिव कनेक्ट को किसान गोविन्द सिंह ने बताया कि मामा को आर्थिक लाभ को देखकर उनके पिता ने भी 12 बीघा जमीन पर Okra Cultivation की और उनकी भी मामा की भांति कमाई हुई।

गोविंद बताते हैं, उनके पास पुश्तैनी करीब 250 बीघा जमीन है। पारंपरिक खेती से इतना मुनाफा नहीं होता था। लेकिन, जब पता चला कि सब्जियां उगाकर इतना मुनाफा कमाया जा सकता है तो पूरे खेत में सब्जियां उगाने का निर्णय लिया।

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अन्य किसान भी आगे आए

पॉजिटिव कनेक्ट से चर्चा के दौरान किसान गोविन्द ने बताया कि उनके मुनाफे की चर्चा पूरे गांव में होने लगी तो गांव के कई अन्य किसान भी आगे आए। उन्होंने हमारे खेत पर आकर Okra Cultivation करने का तरीका सीखा और Okra Cultivation की तो उनकी भी अच्छी कमाई हुई।

अब दिल्ली-जयपुर भेजते हैं भिंडी

इस गांव में अब भिंडी की इतनी अधिक पैदावार हो रही है, जिसे भरतपुर मंडी में खपाया नहीं जा सकता। इस कारण यहां से नियमित 15-20 पिकअप व केन्ट्रा गाड़ी से भिंडी को दिल्ली, जयपुर के अलावा मथुरा, आगरा तक बेचने के लिए भेजा जाता है। पॉजिटिव कनेक्ट को ठेई गांव के किसान गोविन्द ने बताया। वे बताते हैं, Okra Cultivation से गांव के कई अन्य किसान भी लखपति बन चुके हैं।

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गोविन्द कमा रहे हर साल 2 करोड़

पॉजिटिव कनेक्ट से बातचीत में किसान गोविन्द बताते हैं कि एक बीघा में करीब एक क्विंटल भिंड़ी होती है। एक पेड़ से 60 बार भिंड़ी तुड़ाई की जा सकती है, जो एक दिन के अंतराल के बाद की जाती है।

गोविन्द बताते हैं, मेरे परिवार के पास ढाई सौ बीघा जमीन है। जिससे वे हर साल 2 करोड़ रुपए से अधिक कमा लेते हैं। ये कमाई सब्जियों के भाव व सप्लाई पर निर्भर होती है।

जमीन                                      पैदावार                               कमाई

100 बीघा                         आलू                                   60 लाख
50 बीघा                           भिंडी                                  55 लाख
100                                 बीघा बैंगन, शिमला मिर्च     01 करोड़
                                       गोभी, टमाटर

कमाई से बनाई फाइनेंस कंपनी

12वीं तक पढ़े किसान गोविंद सिंह पॉजिटिव कनेक्ट को बताते हैं, Okra Cultivation से हुए मुनाफे का इंवेस्टमेंट फाइनेंस कंपनी में किया। वे शर्तों के अनुसार एक लाख रुपए का लोन देते हैं। उनकी कंपनी से करीब 100 लोग जुड़े हैं।

मजदूर नहीं मिलने की आती है समस्या

गांव के अन्य किसान अमरसिंह, देवेन्द्र, रूपकिशोर व महेश आदि का कहना है कि भिंडी के अलावा किसान और भी खेती करते हैं, लेकिन सभी तरह के खेती के मुकाबले भिंडी ज्यादा मुनाफा देती है। भिंडी की खेती (Okra Cultivation) में सबसे बड़ी समस्या मजदूर नहीं मिलने की होती है। इसका कारण वे भिंडी को तोड़ते समय शरीर में खुजली होने का अंदेशा बताते हैं। करीब 1 बीघा में भिंडी की तुड़ाई के लिए 5 मजदूरों की जरूरत पड़ती है।

ऐसे रुका गांव से पलायन

ग्रामीणों ने पॉजिटिव कनेक्ट को बताया कि पहले गांव के लोग मजूदरी करने के लिए आसपास के शहरों में जाते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं है। पहले ग्रामीण आर्थिक रूप से कमजोर थे तो उन्हें ब्याज पर भी पैसा लेना पड़ता था, लेकिन अब यहां के ग्रामीण Okra Cultivation करके आत्मनिर्भर बन गए हैं और यहां से ग्रामीणों का पलायन भी रूक गया है। किसान Okra Cultivation के बाद गेहूं की फसल भी उगाते हैं, जिससे उनकी आमदनी भी बढ़ रही है।

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