By – राजेश खण्डेलवाल
03 October 2025
छोटी उम्र में ससुराल पहुंची Geeta Kumari को पता चला कि गांव में स्कूल नहीं है। इसी कारण बालिकाएं पढऩे नहीं जाती। राजस्थान की Geeta Kumari ने अपने ससुर से 3 बीघा जमीन दान कराकर खेजड़ी के पेड़ के नीचे स्कूल शुरू किया और खुद ही बच्चों को पढ़ाने लगी। वरिष्ठ प्रबोधक Geeta Kumari की निष्ठा, मेहनत और लगन से नेशनल टीचर अवार्ड 2020 मिला। बालिका शिक्षा के प्रति समर्पित गीता कुमारी की यह कहानी हर उस महिला के लिए प्रेरणादायक है, जो छोटी-छोटी समस्याओं से ना केवल घबरा जाती हैं, बल्कि अपना हौंसला व हिम्मत भी खो बैठती हैं।
बालिका शिक्षा को समर्पित Geeta Kumari ने लिया देहदान का संकल्प
बाड़मेर (राजस्थान)। पीहर में 8वीं के बाद आगे की पढ़ाई के लिए स्कूल का अभाव तो ससुराल में पढ़ाई का माहौल ही नहीं मिलना राजस्थान की Geeta Kumari को बैचेन करने लगा, लेकिन गीता कुमारी ने हर समस्या का हल निकालने की ठान ली। गीता कुमारी अब तीन विषयों में एमए के साथ बीएड कर चुकी हैं और अपनी मेहनत से वर्ष 2020 में नेशनल टीचर अवार्ड में पाया।
परिस्थितियां चाहें कैसी भी क्यों ना हों, अगर कोई लक्ष्य पाने की ठान ले उसे अपनी मेहनत और लगन से हासिल कर ही सकता है। इसका जीवंत उदाहरण है बाड़मेर की Geeta Kumari, जिसने ना कभी हौंसला खोया और ना हिम्मत हारी। वर्ष 2020 में नेशनल टीचर अवार्ड ले चुकी Geeta Kumari का जमीन से सकारात्मक जुड़ाव आज भी है।
देहदान का संकल्प ले चुकीं दो बच्चों की मां Geeta Kumari स्कूल में बच्चों को पढ़ाने के साथ घर पर बेहिचक गोबर-पानी और खेती-बाड़ी जैसा काम बखूबी करती हैं। आज भी संयुक्त परिवार में रह रहीं Geeta Kumari पॉजिटिव कनेक्ट से कहती हैं कि ये सब तो घर का काम है, इसमें शर्म किस बात की?
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छिप-छिपकर करती थीं पढ़ाई
पॉजिटिव कनेक्ट से चर्चा के दौरान छिप-छिपकर पढ़ाई करने के दिनों को याद करते हुए Geeta Kumari बताती हैं, पीहर में 8वीं तक ही स्कूल था और घर वाले पढऩे के लिए दूर भेजने को तैयार नहीं थे। ससुराल में पढऩे का माहौल ही नहीं मिला, लेकिन आगे पढऩे का मन बहुत था।
ऐसे में किताब में से छोटी-छोटी पर्चियां बनाती और उन्हें डेढ़ किलोमीटर पानी लेने जाते समय या फिर खेत पर काम करते समय साथ रखती। इस दौरान समय मिलने पर पर्चियों से ही पढ़ाई करती।
पेड़ के नीचे शुरू किया स्कूल
राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित Geeta Kumari पॉजिटिव कनेक्ट को बताती हैं कि वर्ष 2000 में गांव कवास में शादी हुई, तब यहां कोई बालिका स्कूल नहीं जाती थी।
पूछने पर पता चला कि गांव या फिर नजदीक के गांव स्कूल ही नहीं था। इस पर अपने ससुर रेमताराम से पुश्तैनी जमीन में से 3 बीघा जमीन दान कराकर स्कूल की स्थापना करवाई।
चुनौतियां भी कम नहीं
उस समय को याद करते हुए Geeta Kumari बताती हैं कि पेड़ के नीचे बैठने के लिए धरती ही छत व आसमान था। ना पानी था, ना लाइट। खुला वातावरण ही क्लास रूम था।
पर्यावरण को पढ़ाने के लिए पेड़-पौधे, लिखने के लिए धरती, हिंदी और अंग्रेजी वर्णमाला पढ़ाने के लिए घरेलू नमक व मिर्च के रेपर को एकत्र कर साथ लाती। उसी पर लिखे हुए अल्फाबेट को पढ़ती, लेकिन कभी ऐसा महसूस नहीं हुआ कि कोई समस्या है।
बोलचाल की भाषा को ऐसे बनाया हथियार
पॉजिटिव कनेक्ट को वरिष्ठ प्रबोधक Geeta Kumari बताती हैं, ग्रीष्मकालीन अवकाश में एक-एक माह का प्रशिक्षण होता था, उसमें एकाग्रता के साथ स्वप्रेरित होकर मानसिक व शारीरिक रूप से शामिल होती।
ट्रेनिंग में जो सीखा, उसे स्कूल में क्रियान्वित करती गई। बच्चों से बातचीत करने पर परिवेश व भाषा से नई शब्दावली निकाल कर आती, जिसे मैंने पढ़ाई में हथियार के रूप में उपयोग किया।
इसलिए मिला राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2020
वरिष्ठ प्रबोधक Geeta Kumari बताती हैं कि वर्ष 2002 में खेजड़ी के एक पेड़ के नीचे बच्चों को पढ़ाने की शुरूआत की। अगले 2 साल में 100 बच्चों का नामांकन शत-प्रतिशत ठहराव के साथ रहा।
वर्ष 2006 में कवास गांव में आई बाढ़ में स्कूल के 15 बच्चे काल का ग्रास बन गए। इसके बाद 2 साल तक धोरों (मिट्टी के टीलों) पर आर्मी के टेंट में स्कूल चलाया।
सीमित संसाधन होने के कारण वेस्ट से बेस्ट (कबाड़ से जुगाड़) टीएलएम (टीचिंग लर्निंग मेटेरियल) बनाकर बच्चों को शत-प्रतिशत परिणाम देने पर मुझे (Geeta Kumari) राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए चुना गया।
ऐसे बनीं अपने पिता की कॉपी
पॉजिटिव कनेक्ट से बातचीत में Geeta Kumari बताती हैं, जब मैं छोटी थी, मेरे शिव निवासी पिता जयराम माली शिक्षा कर्मी बोर्ड, लोक जुंबिश, अनौपचारिक शिक्षा, रात्रि पाठशाला में एक्टिविटी बेस शिक्षण कार्य करवाते थे। उनको देखकर मैं बहुत प्रभावित हुई।
वर्ष 2002 में मेरा (Geeta Kumari) शिक्षाकर्मी बोर्ड से शिक्षाकर्मी के रूप में चयन हुआ। तब मैंने भी बच्चों के साथ अपने पिता की कॉपी बनने की कोशिश की। जैसे-जैसे शिक्षण कार्य करवाती तो जैसा आइडिया आता उसी हिसाब से समस्या समाधान में नवाचार कर शिक्षण कार्य करवाती गई। इसका परिणाम बहुत अच्छा रहा और बच्चों को भी आनंद आता चला गया।
प्रशिक्षणों से सीखने-सिखाने में होती है सहुलियत
Geeta Kumari Mali मानती हैं कि राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार मिलने के बाद मेरी जिम्मेदारी बढ़ी है। इसलिए अब मैं किसी भी हाल में शैक्षिक प्रशिक्षण, सेमिनार, कार्यशाला में शामिल हुए बिना नहीं रहती, क्योंकि ऐसे अवसरों पर बहुत कुछ सीखने व समझने को मिलता है। इससे खुद को अपडेट रखने के साथ ही सीखने और सिखाने में काफी सहुलियत होती है।
शैक्षणिक व सहशैक्षणिक गतिविधियों में हों शामिल
पॉजिटिव कनेक्ट से चर्चा के दौरान वरिष्ठ प्रबोधक Geeta Kumari अन्य शिक्षक-शिक्षिकाओं को संदेश देते हुए कहती हैं कि जो जहां कार्यरत हैं, वहीं शैक्षणिक गतिविधि के साथ सहशैक्षणिक गतिविधियों में जरूर शामिल हों, क्योंकि इससे राज्य सरकार के साथ केन्द्र सरकार नई-नई योजनाओं की जानकारी मिलती है।
बच्चों और अभिभावकों की मिलती हैं दुआएं
Geeta Kumari बताती हैं, शैक्षणिक व सहशैक्षणिक गतिविधियों से खुद भी सीखते हैं और बच्चों को सिखाने में भी सुविधा होती है। ऐसी स्थिति में सीखने वाला बच्चा शिक्षक-शिक्षिका को ताउम्र याद रखता है।
सरकारी शिक्षक-शिक्षिकाओं के पास ज्यादातर आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के बच्चे ही पढऩे को पहुंचते हैं। Geeta Kumari बताती हैं, ऐसे बच्चों को अच्छे से पढ़ाया और समझाया जाए तो उनकी और उनके अभिभावकों की दुआएं जरूर मिलती हैं।
तीन विषयों में किया एमए, बीएड भी
Geeta Kumari वर्ष 2002 में शिक्षाकर्मी, वर्ष 2008 में प्रबोधक और वर्ष 2025 में वरिष्ठ प्रबोधक बनीं। गीता ने वर्ष 2001 में दसवीं, 2004 में हायर सैकण्डरी, 2006-07 में बीएसटीसी, 2009 में बीए, 2011 में एमए (समाजशास्त्र), 2014 में बीएड, 2015 में एमए (भूगोल) और 2019 में एमए (लोकप्रशासन) किया।
स्कूल में 80 बच्चे नामांकित
तीन विषयों में एमए के साथ बीएड भी कर चुकी Geeta Kumari फिलहाल वरिष्ठ प्रबोधक के पद पर राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय सरूपोणी, मालियों का वास (पंचायत समिति बाड़मेर ग्रामीण) में कार्यरत हैं, जो कार्यवाहक बतौर संस्था प्रधान का कामकाज भी संभाल रही हैं।
इनका स्कूल बाड़मेर जिला मुख्यालय से 35 किलोमीटर दूर जोधपुर हाई-वे पर है और उसमें नामांकित बच्चों की संख्या फिलहाल 80 है।
गीता के पति करते हैं खेती-बाड़ी
Geeta Kumari के 12वीं पास पति लक्ष्मणराम माली खेती-बाड़ी का काम करते हैं। वहीं बीएससी (कृषि) कर चुका बेटा चन्द्रप्रकाश कृषि सुपरवाइजर और बीएसटीसी कर चुकी बेटी प्रियंका शिक्षक बनने की तैयारी कर रही है।
