अमरपाल सिंह वर्मा
03 October 2024
Dr Mahendrapal Singh Shekhawat राजस्थान के एक गांव में रहकर पिछले 50 साल से ग्रामीणों का फ्री इलाज कर रहे हैं। Dr Mahendrapal की कहानी है सेवा-समर्पण की मिसाल। …
हनुमानगढ़ (राजस्थान) आजकल डॉक्टर मोटी तनख्वाहों पर काम करते हैं या फिर बड़े हॉस्पिटल खोलकर बैठते हैं, जहां अपार धन बरसता है। एमबीबीएस करने के थोड़े समय बाद सामान्य परिवार के युवाओं का धनाढ्य हो जाना आम बात है। लेकिन ऐसे डॉक्टर भी हैं, जिनका उद्देश्य पैसा बनाना नहीं बल्कि गरीब और वंचित वर्ग के लोगों की सेवा करना है। ऐसे ही एक डॉक्टर हैं डॉ. महेन्द्रपाल सिंह शेखावत (Dr Mahendrapal Singh Shekhawat), जिन्होंने राजस्थान के एक गांव में लोगों का फ्री इलाज करते हुए 50 साल बिता दिए हैं।
मानव सेवा की मिसाल बने Dr Mahendrapal Singh Shekhawat का जन्म झुंझुनूं जिले के गांगियासर गांव में खाते-पीते परिवार में हुआ। पिता खुफिया विभाग के अफसर थे। पुरखों की जमीन-जायदाद, पैसा, शौहरत सब कुछ था। शेखावत चाहते थे तो घर बैठ कर आराम से जीवन गुजारते लेकिन उन्होंने डॉक्टर बनकर गरीब का फ्री इलाज करना तय किया।
एमबीबीएस की डिग्री लेते ही Dr Mahendrapal ने सेना ज्वाइन कर ली। ढाई साल बाद सेना छोडकऱ वह हनुमानगढ़ में विख्यात डॉक्टर रूप सिंह राजवी के साथ काम करने लगे, लेकिन थोड़े समय बाद ही उब गए। उनका मन तो किसी गांव में गरीबों, जरूरतमंदों को फ्री इलाज देने का था।
सेवा से रिटायर हो गए मगर गांव से नहीं
Dr Mahendrapal सन् 1974 में पास के डबली राठान गांव मेंं चले गए और वहां क्लिनिक खोलकर लोगों का फ्री इलाज करने लगे। दस साल बाद 1984 मेंं उन्हें सरकारी नौकरी मिली तो Dr Mahendrapal ने पोस्टिंग के लिए डबली राठान के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र को ही चुना।
Dr Mahendrapal ने 20 साल तक इसी गांव मेंं सेवाएं दीं और सन् 2003 में रिटायर हो गए। Dr Shekhawat सरकारी सेवा से भले ही मुक्त हो गए मगर गांव की फ्री इलाज करने की सेवा से मुक्त होने का उनका कोई इरादा नहीं था। वह डबली राठान गांव मेंं ही स्थाई तौर पर बस गए।
जीवन के 81 बसंत देख चुके Dr Mahendrapal का सिर्फ तन ही नहीं, मन भी इसी गांव में बसता है। Dr Shekhawat को कई प्रमोशन-ऑफर मिले लेकिन उन्होंने सब ठुकरा दिए क्यों कि अगर ऑफर स्वीकारते तो उन्हें गांव छोडऩा पड़ता और ग्रामीणों का फ्री इलाज नहीं कर पाते, जो उन्हें कतई मंजूर नहीं था।
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फिर भी नहीं छूटा गांव से मोह
Dr Mahendrapal के बेटे और पौत्र बड़े शहरों मेंं नौकरियां कर रहे हैं। वह अक्सर उन्हें अपने साथ आ कर रहने का आग्रह करते हैं मगर डॉ. शेखावत कभी रजामंद नहीं होते, क्योंकि उन्हें ग्रामीणों की फ्री इलाज करने की सेवा से सुकून जो मिलता था।
वह अपनी पत्नी के साथ गांव में ही खुश थे। छह महीने पहले उनकी पत्नी का निधन हो गया। घर में वह अकेले रह गए मगर गांव का मोह फिर भी नहीं छूटा है।
Dr Mahendrapal पर अब उम्र हावी होने लगी है। स्वास्थ्य जनित कुछ समस्याएं भी आ रही हैं मगर फिर भी पुरानी दिनचर्या बरकरार है। सर्दी हो या गर्मी, सुबह जल्दी उठते हैं, नहा-धोकर तैयार होते हैं।
घर के बरामदे में उनकी मेज-कुर्सी लगी है। स्टेथोस्कोप लेकर बैठ जाते हैं। बीमार लोग एक-एक कर आने लगते हैं। डॉक्टर साब सबको देखते हैं, जरूरत महसूस होने पर कुछ जांचें कराने के लिए भी कह देते हैं। फिर दवाइयां लिखकर दे देते हैं।
गांव वालों को लगता है Dr Mahendrapal को दिखाना जरूरी
करीब बारह हजार की आबादी वाले इस गांव का प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र अब क्रमोन्नत हो कर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र बन गया है। वहां भी अच्छे डॉक्टर हैं लेकिन बहुत से ग्रामीणों को लगता है कि उनका बुखार तब तक नहीं उतरेगा, जब तक Dr Mahendrapal इलाज नहीं करेंगे।
गांव के बच्चे, बड़े, युवा, बूढ़े सब डॉ. शेखावत से ही इलाज करवा कर खुश होते हैं। इस बुजुर्ग डॉक्टर की खुशी भी फ्री इलाज करने मेंं ही है।
उनकी कोशिश रहती है कि एक बार कुर्सी पर बैठ जाएं तो कम से कम एक सौ मरीजों की नब्ज तो टटोल कर ही उठें। न केवल डबली राठान बल्कि आसपास के अन्य गांव और ढाणियों के लोग भी बीमार होने पर Dr Mahendrapal के पास ही आते हैं।
गोशाला को सौंप देते हैं दानपेटी से निकली राशि
Dr Mahendrapal रोजाना करीब सौ मरीजों को देखते हुए फ्री इलाज करते हैं। किसी से फीस नहीं लेनी। हां, मेज के पास गोशाला की दान पेटी जरूर रख छोड़ी है।
जिसकी इच्छा हो तो वह पांच, दस, बीस, पचास रुपए दान पेटी में डाल दे। कोई दबाव नहीं। जो दे उसका भला-जो न दे उसका भी भला। हर महीने की पांच तारीख को दान पेटी में एकत्र हुई रकम गोशाला के सुपुर्द कर दी जाती है।
पेड़ लगाने के लिए भी प्रेरित करते हैं डॉ. शेखावत
Dr Mahendrapal सुबह घर पर मरीजों को देखने मेंं व्यस्त रहते हैं और शाम को गांव में लोगों से बतियाना उनका पसंदीदा शगल है। इस दौरान वह पर्यावरण की फिक्र जरूर करते हैं।
प्रत्येक गांववासी को पेड़ लगाने के लिए प्रेरित करते हैं। गांव मेंं बाहर से आए किसी व्यक्ति को जब Dr Mahendrapal की फ्री इलाज करने की सेवा का पता चलता है तो उसका मन उनके प्रति श्रद्धा से भर उठता है और लबों पर एक ही दुआ होती है-काश! हर गांव को ऐसा ही एक डॉक्टर मिल जाए।
