By – राजेश खण्डेलवाल
08 Novmber 2025
Free Teaching से राजस्थान के अलवर में सीमा मेहता 300 जरूरतमंद बच्चों की मददगार बनी हैं। वे अपने घर पर Free Teaching के अलावा आसपास के दो-तीन सरकारी स्कूलों में जाकर बच्चों को Free Teaching कराती हैं। इनके पति भी इस नेक काम में साथ निभा रहे हैं। शिक्षा और स्वास्थ्य को समर्पित मेहता दंपती ने जरूरतमंदों की सेवा को ही अपना ध्येय बना रखा है।
बच्चों को Free Teaching मिलने से हमें आर्थिक फायदा
अलवर (राजस्थान)। आज कौन किसी के लिए कुछ करता है, लेकिन अलवर की सीमा मेहता इसका अपवाद हैं। यह कहना है कि बुध विहार निवासी प्रियंका मिश्रा का। वे बताती हैं कि 8वीं कक्षा में अध्ययनरत मेरी बेटी जिया एक साल से सीमा मेहता के घर Free Teaching ले रही है। अब पहली कक्षा में पढ़ रहा बेटा देवांश भी जाने लगा है।
पॉजिटिव कनेक्ट से बातचीत में प्रियंका बताती है कि हमारी गली में से दो-तीन अन्य बच्चे भी सीमा मेहता के घर पर Free Teaching लेते हैं। उनका कहना है कि हम बच्चों को फीस देकर टयूशन पढ़ाने की स्थिति में नहीं हैं। सीमा मेहता के Free Teaching से हमें आर्थिक फायदा हो रहा है और उनके यहां बच्चे सीख भी अच्छा रहे हैं। इससे हम बहुत खुश हैं।
सीमा मेहता की पहल सराहनीय
बुधविहार के ही रहने वाले मुरारी लाल भील पॉजिटिव कनेक्ट को बताते हैं कि मेरा 12 साल का बेटा चेतन 7वीं और 14 साल की बेटी भावना 9वीं में पढ़ती हैं। दोनों बच्चे सीमा मेहता के घर पर Free Teaching कर रहे हैं। वे मेरी बेटी का इलाज भी करा रही हैं। बेटी को शुगर की समस्या है।जरूरतमंदों के लिए सीमा मेहता की पहल सराहनीय है।
अब पढऩे में लगने लगा रोहित का मन
7वीं कक्षा में पढ़ रहा बेटा रोहित पिछले 2-3 साल से सीमा मेहता के यहां Free Teaching कर रहा है। रोहित के पिता रमेश चंद पुताई का काम करते हैं। उनके यहां जाने के बाद से रोहित बहुत अच्छा सीख रहा है और अब उसका पढ़ाई में मन भी लगने लगा है। रोहित मां गायत्री ने पॉजिटिव कनेक्ट को बताया।
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पढ़ाई के साथ स्कूल में प्रवेश भी
अलवर की समाजेसवी सीमा मेहता बच्चों को Free Teaching ही नहीं हैं, उनका सरकारी स्कूल में एडमिशन कराने में भी मदद करती हैं। वे जन्मदिन पर केक नहीं काटती, बल्कि स्कूलों में एलईडी और फर्नीचर देती हैं। इस काम में उनके पति अरुण मेहता भी पूरा साथ निभा रहे हैं। यह मेहता दंपती नियमित शहर के दो-तीन सरकारी स्कूलों में जाकर दो से तीन घंटे बच्चों को Free Teaching देते हैं।
इसलिए घर को बनाया पाठशाला
सीमा मेहता ने पॉजिटिव कनेक्ट को बताया कि मेरी दो बेटियों के शिक्षित होकर खुद के पैरों पर खड़े होने के बाद मैंने यही सपना हर बेटी के लिए देखना शुरू किया और इसे पूरा करने के लिए मैंने पति के सेवानिवृत होने के बाद उनकी इच्छा पर वर्ष 2018 में अपने घर को ही पाठशाला बना लिया, जहां नियमित 25-30 बच्चे Free Teaching करने आते हैं।
कोरोना में ऐसे मिली राह
पॉजिटिव कनेक्ट से बातचीत के दौरान सीमा मेहता बताती हैं कि कोरोनाकाल में स्कूल बंद हुए तो मैंने पास की बस्ती में जाकर Free Teaching करना शुरू किया। शुरुआत में बच्चियां पढऩे से कतराती थीं, लेकिन धीरे-धीरे वे जुड़ती गईं।
उस समय को याद करते हुए गर्व के साथ सीमा मेहता बताती हैं कि आज वही बेटियां बोर्ड परीक्षाओं में 70 से 80 प्रतिशत तक अंक लाकर अपने सपनों को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
हर बेटी पढ़े और आगे बढ़े
पॉजिटिव कनेक्ट से चर्चा के दौरान सीमा मेहता कहती हैं कि समाज में हर बेटी पढ़े और आगे बढ़े। यही मेरा मकसद है। वे कहती हैं, बेटी पढ़ेगी तो आत्मनिर्भर भी बन सकेगी।
कच्ची बस्तियों व निम्न वर्ग परिवारों में बेटियां ज्यादा पढ़ नहीं पाती हैं या फिर बीच में पढ़ाई छोड़ देती हैं, क्योंकि आर्थिक तंगी के कारण वे फीस नहीं भर पाती हैं, ड्रेस नहीं खरीद पाती हैं। इसलिए मैंने इन बेटियों को Free Teaching करने का फैसला किया है।
सरकारी स्कूलों में शिक्षिकों का टोटा
ज्यादातर सरकारी स्कूलों में शिक्षिकों का टोटा रहता हैं। इस कारण मैं अपने पति अरुण मेहता के साथ हसन खां मेवात नगर, शिवाजी पार्क के सरकारी स्कूलों में जाकर प्रतिदिन 250 से ज्यादा बच्चों को दो से तीन घंटे Free Teaching देती हूं। पॉजिटिव कनेक्ट को शहर के हसन खां मेवात नगर निवासी सीमा मेहता अलवर ने बताया।
पति का मिला साथ तो बढ़ गया हौंसला
स्नातक के बाद होटल मैंनजमेंट और फैशन डिजाइनिंग की पढ़ाई कर चुकी सीमा मेहता पॉजिटिव कनेक्ट से बातचीत में कहती हैं कि समाज ने हमें बहुत कुछ दिया है। अब हमारी बारी है कि हम भी समाज को भी कुछ दें। मेरी एक बेटी इंजीनियर है। पति अरुण मेहता यूआईटी अलवर में अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जिनका साथ मिलने से मेरा हौंसला बढ़ा है।
ऐसे बदल रही बेटियों की तकदीर
अलवर की समाजसेविका सीमा मेहता बताती हैं कि कोरोना के बाद से मैं और मेरे पति सरकारी स्कूल में जाकर 9वीं और 10वीं की बेटियों को Free Teaching देते हैं, घर पर उनकी अच्छी तैयारी करवाते हैं। ज्यादातर बेटियों के बोर्ड में 70 से 80 प्रतिशत अंक मिले हैं और वो अब मनपसंद विषय लेकर पढ़ रही हैं। कई तो नीट भी क्लीयर कर चुकी हैं।
शुरुआत में परेशानी आई
कोरोना में जब स्कूल बंद हुए तो बहुत सी बेटियों की पढ़ाई बीच में ही छूट गई। इसी दौरान मुझे बेटियों को Free Teaching का मौका मिला। इसकी शुरुआत पास की कच्ची बस्ती से की, जहां मां-बाप मजदूरी करने चले जाते और बच्चे घर पर ही रह जाते, खासकर बेटियां। बस्ती में जाकर बच्चों को Free Teaching करने लगी। शुरुआत में यह परेशानी आई कि वे बच्चे पढऩा नहीं चाहते थे, धीरे धीरे समझने लगे और फिर नियमित पढऩे भी लगे।
कई लोग दे रहे आर्थिक सहयोग
Free Teaching व मानसिक स्वास्थ्य के लिए काम कर रहीं सीमा मेहता बताती हैं कि कई परिचित लोग व्यस्तता के कारण पढ़ाने के लिए तो समय नहीं दे पा रहे, लेकिन वे बच्चों को पाठ्य सामग्री के साथ डे्रस आदि वितरित करने में आर्थिक सहयोग अवश्य कर रहे हैं। पति के दोस्त और अलवर यूआईटी से सेवानिवृत अशोक धींगरा भी बच्चों को फ्री शिक्षा देते हैं।
‘उनकी खुशी’ से बढ़ता हमारा उत्साह
Free Teaching से जरूरतमंद बच्चों की मदद करने से सुकून मिलता है। कई जरूरतमंदों का इलाज भी कराया है। इस तरह जरूरतमंदों के खुश होने से हमारा भी उत्साह बढ़ता है। Free Teaching के लिए समर्पित सीमा मेहता के पति अरुण मेहता ने पॉजिटिव कनेक्ट को बताया।
