By – राजेश खण्डेलवाल
12 Octomber 2025
पहले बाजरे की फसल से लाभ कमाया तो अब गेहूं की विशेष किस्म मिनी इजराइली कनक (Israeli Kanak) ने राजस्थान के प्रगतिशील किसान दिनेश तेनगुरिया की कमाई को 2 गुणा कर दिया है। इससे इन्होंने ऐसी पैदावार पाई, जो दूर तक चर्चा में है। खेती में नवाचार से मिली सतत सफलता से उत्साहित युवा किसान दिनेश अब अन्य किसानों के लिए प्रेरक बने हैं।
नई तकनीक से खेती में बदलाव संभव
भरतपुर (राजस्थान)। किसान अगर नई तकनीक अपनाए तो खेती में बदलाव लाया जा सकता है। बीज तो बहुत मिलते हैं पर सही बीज वह होता है, जो फसल का वजन और उत्पादन दोनों बढ़ाए। कुछ ऐसा ही मानना है कि राजस्थान के प्रगतिशील किसान दिनेश चंद तैनगुरिया का।
किसान दिनेश का यह भी मानना है कि अच्छा बीज थोड़ा महंगा मिलता है, लेकिन एक बार किसान उसे बो दे तो अगली बार खुद बीज रख सकता है और यही असली आत्मनिर्भर खेती कहलाती है।
तुर्की के सादा गोल्ड बाजरे की खेती में मिली सफलता से उत्साहित किसान दिनेश तेनगुरिया ने अब मिनी इजराइली ‘कनक’ गेहूं (Israeli Kanak) से ऐसी पैदावार हासिल की, जो दूर तक चर्चा में है।
भरतपुर और आसपास के क्षेत्रों में किसान दिनेश चंद तेनगुरिया की पहल को अब मॉडल खेती के रूप में देखा जा रहा है। उनके खेत पर कई किसान पहुंचकर नई वैरायटी को देख चुके हैं और बीज खरीदने की जानकारी ले रहे हैं।
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नवाचार व मेहनत लाई रंग
राजस्थान में भरतपुर जिले के गांव पीपला के प्रगतिशील किसान दिनेश चंद तेनगुरिया पॉजिटिव कनेक्ट को बताते हैं, मिनी इजराइली ‘कनक’ गेहूं (Israeli Kanak) से 34 क्विंटल प्रति एकड़ का रिकॉर्ड उत्पादन किया, जिसने साबित कर दिया कि नवाचार के साथ कड़ी मेहनत और लगन से काम किया जाए तो मिट्टी भी सोना उगलती है।
युवा किसान दिनेश बताते हैं कि इसी कारण अब उनके मिनी इजराइली ‘कनक’ गेहूं (Israeli Kanak) के बीज की मांग देश के कई राज्यों के साथ नेपाल तक में है।
दो साल पहले मंगाया था ‘कनक’
दिनेश चंद तेनगुरिया ने बताया कि उन्होंने दो साल पहले एक परिचित के जरिए हिमाचल प्रदेश से गेहूं की खास किस्म मिनी इजराइल ‘कनक’ (Israeli Kanak) का बीज मंगवाया था।
700 रुपए किलो आया ‘कनक’
बातचीत के दौरान किसान दिनेश ने पॉजिटिव कनेक्ट को बताया, Israeli Kanak करीब 10 किलो बीज 700 रुपए प्रति किलो के हिसाब से आया था। पहले साल ट्रायल किया तो नतीजे उम्मीद से बेहतर मिले, इसलिए इस साल एक एकड़ जमीन में मिनी इजराइल ‘कनक’ (Israeli Kanak) बीज बोया। वे बताते हैं कि एक एकड़ में जो परिणाम मिला, वह हर किसान का सपना होता है।
मिनी इजराइली कनक की विशेषताएं
पॉजिटिव कनेक्ट को भरतपुर के युवा किसान दिनेश चंद तेनगुरिया बताते हैं कि गेहूं के मिनी इजराइली ‘कनक’ (Israeli Kanak) बीज की कई विशेषताएं हैं, जो किसानों के लिए विशेष रूप से लाभदायक है।
दोगुणा हो गया उत्पादन
इस बार 34 क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन हुआ। पारंपरिक वैरायटी से गेहूं की उपज करीब 17 मन प्रति बीघा मिलती है, वहीं मिनी इजरायली ‘कनक’ (Israeli Kanak) ने लगभग दोगुनी उपज दी। पॉजिटिव कनेक्ट को भरतपुर के युवा किसान दिनेश ने बताया।
मोटा दाना, 3 गुना लंबी बाली
किसान दिनेश ने पॉजिटिव कनेक्ट को बताया कि मिनी इजरायली ‘कनक’ (Israeli Kanak) के दाने की बात करें तो यह किसी साधारण गेहूं जैसा नहीं दिखता है। इसका दाना बड़ा, बोल्ड, लालिमा लिए चमकदार होता है। दाना इतना भारी होता है कि हाथ में लेते ही फर्क समझा जा सकता है।
बालियां भी दोगुणी लम्बी
आम गेहूं की बालियां 3-4 इंच की लम्बाई में होती हैं, वहीं इजरायली ‘कनक’ (Israeli Kanak) की बालियां 6 से 12 इंच तक लम्बी होती हैं। पौधे की ऊंचाई भी लगभग कमर तक होती है तो सबसे खास बात यह कि पौधे का तना मोटा होने की वजह से इस गेहूं की फसल हवा या बारिश में गिरती नहीं। इससे फसल को नुकसान का खतरा काफी कम हो जाता है।
125 दिन में फसल तैयार
मिनी इजराइली कनक (Israeli Kanak) गेहूं की फसल में 4 बार पानी देना होता है। पहला अंकुरण के बाद, दूसरा फसल की बढ़त पर, तीसरा फसल में फूल आने पर और चौथा फसल में दाना बनने पर।
चार बार पानी के बाद यह फसल 125 दिन में पूरी तरह पक जाती है। इसकी बुवाई का सबसे उपयुक्त समय 25 अक्टूबर से 15 नवम्बर तक है। बातचीत के दौरान पॉजिटिव कनेक्ट को युवा किसान दिनेश ने बताया।
देश से विदेश तक पहुंचा बीज
किसान दिनेश तेनगुरिया ने बताया कि उनके तैयार Mini Israeli Kanak बीज की मांग राजस्थान के अलावा झारखंड, मध्य प्रदेश, गुजरात, उत्तर प्रदेश (अलीगढ़) तक से आ चुकी है।
पॉजिटिव कनेक्ट को उन्होंने बताया कि हमारा Mini Israeli Kanak बीज अब नेपाल तक पहुंच गया है और हाल ही में सऊदी अरब से भी कॉल आए हैं। वहां रहने वाले भारतीय किसानों ने यह बीज मंगाने की इच्छा जताई है। एक छोटे से गांव से गेहूं का मिनी इजराइल कनक (Israeli Kanak) बीज अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने की ओर कदम बढ़ा चुका है।
इस तरह राजस्थान के भरतपुर की उपजाऊ धरती ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि नवाचार और किसान की मेहनत मिलकर नए आयाम स्थापित कर सकते हैं।
