By – साधना सोलंकी
11 September 2025
शिक्षिका सुनीता गुलाटी (Teacher Sunita Gulati) का दिव्यांगों के प्रति गहरे लगाव का कारण उनके खुद के देवर की तकलीफ रही, जिसने राजस्थान के बीकानेर की शिक्षिका सुनीता (Teacher Sunita Gulati) को नेशनल टीचर अवार्ड 2022 दिलाया। पहले सुनीता भी अन्य की भांति सामान्य सरकारी शिक्षिका थीं, लेकिन दिव्यांगों से हुए सकारात्मक जुड़ाव (Positive Connect) ने उन्हें विशेष शिक्षिका बना दिया।
सुनीता को देवर के दर्द ने बनाया धुरंधर
बीकानेर (राजस्थान)। टीचर सुनीता गुलाटी (Teacher Sunita Gulati) ने बीकानेर की शहर परंपरा को आत्मसात कर अपने कार्यक्षेत्र की गरिमा को अपने सेवा समर्पण भाव से बढ़ाया है। दिव्यांगों के लिए कुछ कर गुजरने का बीजारोपण उनके ह्रदय में तब हुआ, जब अपने दिव्यांग देवर रविकांत की तकलीफ को निकटता से देखा।
घर से जानी दिव्यांग की पीर
बीकानेर शहर के राजकीय माध्यमिक मूक बधिर विद्यालय से जुड़ी 48 साल की टीचर सुनीता गुलाटी (Teacher Sunita Gulati) पॉजिटिव कनेक्ट को बताती हैं, उस बच्चे की तकलीफ क्या होती होगी जो बोलना चाहता है, पर साफ नहीं बोल पाता। अपनी बात समझाने के लिए बहुत प्रयास करता है, पर सफल नहीं हो पाता।
वह अपनी मर्जी से न करवट ले सकता है, न बैठ सकता है, ना उठ सकता है। इस तकलीफ के एहसास को बहुत करीब से अपने देवर रविकांत के माध्यम से सुनीता (Teacher Sunita Gulati) ने महसूस किया तो भविष्य में दिव्यांग बच्चों की शिक्षिका बन इन बच्चों की मदद करने का कोई भूला सा सपना जैसे साकार हुआ।
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अपूर्व साहस और संवेदना से भरपूर
टीचर सुनीता (Teacher Sunita Gulati) आज मूक बधिर बालकों का बढ़ा हुआ आत्मविश्वास देखती हैं तो और भी अधिक उमंग से इस क्षेत्र की गहराई में उतरती जाती हैं। उनके प्रयास रंग लाए और इन बच्चों में जीवन जीने की ललक बलवती हुई। उनके छात्र-छात्राएं अपने भावों का इजहार सांकेतिक रूप से भली-भांति कर सकते हैं…वे सामान्य बच्चो के संग कदम ताल कर सकते हैं।
पॉजिटिव कनेक्ट को टीचर सुनीता गुलाटी (Teacher Sunita Gulati) बताती हैं कि शारीरिक रूप से भले ही ये बालक अपूर्ण हों पर भीतर से ये अपूर्व साहस और संवेदना से भरे होते हैं। बस, इन्हें सही दिशा-निर्देशन की जरूरत है।
बिटिया को नहीं गिरने दिया पलंग से
उस समय को याद करते सुनीता (Teacher Sunita Gulati) पॉजिटिव कनेक्ट को बताती हैं कि, 2001 में मेरा विवाह हुआ और मेरी मुलाकात 23 साल के दिव्यांग देवर रविकांत से हुई। वे शारीरक रूप से सक्षम नहीं थे। सास-ससुर उनकी देखभाल करते थे। ससुराल आने के बाद मैं भी हाथ बटाने लगी। तब मैं घर पर ही बतौर हाउस वाइफ रहती थी।
वर्ष 2005 में मेरी (Teacher Sunita Gulati) सामान्य शिक्षिका की भांति सरकारी नौकरी लगी और मैं मां भी इस दौरान बन चुकी थी। देवर-भाभी के रिश्ते का देवरजी को कितना भान था, यह तब जाना जब पलंग पर सोई बिटिया गुडिय़ा नीचे गिरने को हुई और देवर रविकांत ने अपनी अंगुली से उसके फ्रॉक को कस कर इस तरह पकड़ा कि गुडिय़ा नीचे नहीं गिरी।
यह दृश्य बहुत कुछ कहने समझने को पर्याप्त था। साल 2016 में रविकांत दुनिया को अलविदा कह गए पर दिव्यांगों के लिए कुछ कर गुजरने का संदेशा यह विदाई मुझे (Teacher Sunita Gulati) दे गई।
2017 से शुरू हुआ सफर अब जुनून बना
पॉजिटिव कनेक्ट से चर्चा के दौरान शिक्षिका सुनीता (Teacher Sunita Gulati) बताती हैं कि मूक, बधिर बच्चों के संग मैंने दृष्टि बाधित बच्चों की संवेदना को भी जाना-समझा और मैं जुट गई…मेरी पहली चुनौती इनकी भाषा को समझने की थी, क्योंकि मैं सामान्य शिक्षिका थी।
मुझे साइन लैंग्वेज ( दिव्यांगो की सांकेतिक भाषा, ब्रेल लिपि सहित) नहीं आती थी। तब मैंने पहला काम यह किया कि मैं इन बच्चों के साथ जुडकऱ साइन लैंग्वेज सीखने का प्रयास करने लगी।
इन बच्चों ने मेरा बहुत साथ दिया। मेरा प्रयास रंग लाया और मैंने (Teacher Sunita Gulati) इसी विषय विशेष में बीएड किया। धीरे-धीरे इन बच्चों की क्षमताओं और बारीकियों की गहराई में उतरती चली गई।
श्रेष्ठ डिजिटल शिक्षण माहौल
टीचर सुनीता गुलाटी (Teacher Sunita Gulati) पॉजिटिव कनेक्ट को बताती हैं, बतौर शिक्षिका दिव्यांग बच्चों के साथ जुडऩे का 8 बरस का अनुभव मेरे पास है। इस जुड़ाव के चलते ही मैंने उनकी क्षमताओं को समझा है और उन्हें इसी के अनुसार शिक्षित किया है।
मेरी (Teacher Sunita Gulati) मेहनत और जज्बे को पहचान मिली, जब मुझे वर्ष 2022 में राष्ट्रपति के हाथों से राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार मिला। मैं आज भी डिजिटल शिक्षा माध्यम से देर रात तक ऑनलाइन क्लास लेती हूं।
पहली बार चुने गए बच्चे
शिक्षिका सुनीता गुलाटी (Teacher Sunita Gulati) बातचीत में पॉजिटिव कनेक्ट को बताती हैं, नवंबर 2017 में जब मेरा प्रमोशन वरिष्ठ शिक्षिका (विज्ञान) के पद पर राजकीय मूक बधिर विद्यालय, बीकानेर में हुआ तो इन बच्चों में मैंने दिवंगत देवर रविकांत की छवि देखी।
यहां कार्य करके मुझे लगा कि इन बच्चों में वैज्ञानिक नवाचार जागृत किया जाए तो यह बच्चे बहुत कुछ कर सकते हैं। इन बच्चों में बहुत कुछ कर गुजरने की लगन व ललक थी।
पॉजिटिव कनेक्ट को सुनीता (Teacher Sunita Gulati) बताती हैं, मैं अनुभव से कह सकती हूं कि कोई भी कार्य चाहे ये शारीरिक रूप से ना कर सकें, लेकिन मानसिक रूप से ये हर कार्य को करने की इच्छा रखते हैं। इसी जज्बे को सार्थक साकार रूप देने का प्रयास मैंने किया।
बच्चों को विज्ञान मेलों में और राज्य सरकार की ओर से आयोजित विविध प्रतियोगिताओं जैसे जीवन कौशल आदि में इनको शामिल किया। उस दिन इनके संग मैं भी बहुत खुश थी, जब मेरे ((Teacher Sunita Gulati)) द्वारा प्रशिक्षित बच्चों में से कुछ का चुनाव कर लिया गया। यह चुनाव बीकानेर के लिए पहला होने का गौरव भी लिए था।
अब बोलती हैं दीवारें
पॉजिटिव कनेक्ट से अपने अनुभव सांझा करते हुए सुनीता (Teacher Sunita Gulati) उत्साहित होकर बताती हैं कि स्कूल में एक रूम ऐसा था, जो खाली था और उसका कोई उपयोग नहीं हो रहा था।
मैने बच्चों को प्रेरित किया कि वे अपने मनोभावों को इन खाली दीवारों पर चित्रित करें। बच्चों ने यह कर दिखाया। यकीन मानिए, ऐसा लगता है, जैसे दीवारों को जुबां मिल गई और वे बतियाने लगी हैं।
