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एक पहल

Hockey in Hanumangarh: ‘इन्होंने’ ऐसे बढ़ाई साख

Hockey in Hanumangarh
Hockey and Hanumangarh

By – साधना सोलंकी
04 September 2025

हनुमानगढ़ में हॉकी (Hockey in Hanumangarh) का नाता ऐसा है, जिसने भी इसे जाना-समझा तो वह उल्लास में बल्ले-बल्ले कह उठता है। श्रीगंगानगर जिले से यह शहर वर्ष 1994 में अलग होकर स्वतंत्र जिला बना। वीर बजरंगी हनुमान के नाम पर इस शहर का नामकरण पुरातन ऐतिहासिक भटनेर से बदलकर हनुमानगढ़ हुआ। जंक्शन और टाउन में बंटे हनुमानगढ़ जिले के पंच गौरव में शामिल हॉकी की हनुमानगढ़ में (Hockey in Hanumangarh) साख बढऩे की दिलचस्प कहानी…

Hockey in Hanumangarh

Hockey in Hanumangarh स्टेडियम को मिले एस्ट्रोटर्फ की सौगात

हनुमानगढ़ ( राजस्थान )। हनुमानगढ़ में हॉकी (Hockey in Hanumangarh) की यह कहानी एन.एम. कॉलेज हनुमानगढ़ टाउन से परमजीत सिंह गुमान (पूर्व चीफ कोच भारतीय विश्वविद्यालय, राजस्थान विश्वविद्यालय) की अगुवाई में वर्ष 1971 में शुरू हुई और वर्ष 1974 में इसके उत्साहवर्धक परिणाम आने लगे। Hockey in Hanumangarh राजस्थान प्रदेश से बाहर झांकती देश-परदेश में जीत के तमगे, ट्रॉफी बटोरती, जश्न मनाती राजीव गांधी हॉकी स्टेडियम तक पहुंची। इसी स्टोडियम को अब एस्ट्रोटर्फ की सौगात मिलने का इंतजार है।

नाज है अपने हॉकी खिलाडिय़ों पर

एनएम कॉलेज मैदान से बतौर खिलाड़ी हरफूल सिंह (70) का हॉकी सफर वर्ष 1974 से 1979 के बीच खूब परवान चढ़ा, जिन्होंने 5 बार राजस्थान यूनिवर्सिटी का प्रतिनिधित्व किया। सीनियर व जूनियर नेशनल को भी रिप्रजेंट किया।

इन्होंने बतौर कोच देश को सुरेन्द्र पलाड (कांस्य पदक, टोक्यो ओलंपिक 2021), राजकुमार पाल (ओलंपिक पेरिस 2024), उत्तम सिंह (कैप्टन जूनियर हॉकी टीम विश्व कप, गोल्ड मैडेलिस्ट एशियन हॉकी चैंपियनशिप चाइना 2024), जगवंत सिंह (गोल्ड मैडेलिस्ट जूनियर हॉकी टीम जूनियर एशियन हॉकी चैंपियनशिप हैदराबाद 2008) जैसे अन्तर्राष्ट्रीय व राष्ट्रीय खिलाड़ी दिए। वर्ष 1992 से 2008 के दौरान हरफूल ने एसएआई ट्रेनिंग सेन्टर कुरुक्षेत्र को अपने अनुभव की प्रशासनिक सेवा से नवाजा। वर्ष 2009 से 2014 एनआईएस पटियाला में चीफ कोच रहते हुए यहीं से सेवानिवृति ली।

Positive Connect से बातचीत के दौरान गाजीपुर (उत्तर प्रदेश) के उत्तम सिंह कहते हैं, हरफूल सर की अपने खिलाडिय़ों के लिए संवेदना में एक दोस्त, पिता, अभिभावक जैसा प्यार घुला है। वे फटकारते हैं तो गले भी लगाते हैं।

Hockey in Hanumangarh

दिल है कि मानता नहीं

राष्ट्रीय व रेलवे खिलाड़ी रहे और वर्तमान में Hockey in Hanumangarh खिलाडिय़ों की हौंसला अफजाई के लिए प्रयासरत कोच दर्शन सिंह संधु का हॉकी प्रेम जैसे जुनून का पर्याय है। उम्र को पीछे धकेल इस खेल को युवा रखने की उनकी चाहत कमाल की है। सांझ ढलते ही दर्शन सिंह के कदम खेल मैदान की ओर बढऩे लगते हैं।

उनका विशेष झुकाव उन ग्रामीण बेटियों को प्रोत्साहित करने पर रहता है, जो बेहद कमजोर आर्थिक हालात से जूझते भी Hockey in Hanumangarh खेल में रुचि रखती हैं। दर्शन तमाम बच्चों, युवाओं में हॉकी का हुनर रोपते हैं और उनमें खेल के भावी सुनहरे भविष्य को पुख्ता करते हैं। वे हंसकर Positive Connect से कहते है…दिल है कि मानता नहीं!

नशा मुक्ति का बेहतर विकल्प

Positive Connect को दर्शन सिंह बताते हैं, यह खेल Hockey in Hanumangarh सामाजिक सांस्कृतिक सरोकारों से भी जुड़ा है। श्रीगंगानगर जिला हो या हनुमानगढ़ का इलाका…नशा लत की बेडिय़ों से जकड़ा है। यह लत विशेषकर युवाओं के भविष्य को डस रही है और उन्हें पंगु बना रही है।

Hockey in Hanumangarh के प्रति नई पीढ़ी का रुझान बढ़ता है तो स्वस्थ सेहतमंद सांसों की सकारात्मकता का संदेशा उन्हें जीवन के प्रति आस्थावान और यह बदलाव समाज के प्रति संवेदनशील भी बनाता है।

Hockey in Hanumangarh.

गांव की ये बच्चियां हैं अनमोल

राजीव गांधी स्टेडियम में दर्शन सिंह के अलावा कोच गुरदीप सिंह (गांव गुरुसर में पीटीआई शिक्षक) और हरबीर सिंह (एनआईएस कोच राजीव गांधी स्टेडियम) का ग्रामीण कमजोर तबके की बच्चियों व बच्चों को आगे बढ़ाने के लिए समर्पण काबिले तारीफ है।

इनके प्रयास का ही नतीजा है कि इनकी प्रशिक्षित बच्चियां Hockey in Hanumangarh अंडर 14 और अंडर 17 राजस्थान विजेता रहीं। बातचीत में दर्शन बताते हैं कि गुरुदीप सिंह अपनी जेब से वैन का किराया 500 रुपए रोजाना देकर खिलाडिय़ों को स्टेडियम लाते हैं।

जुड़वां भाई मस्तान सिंह व नसीब सिंह

एनएम कॉलेज से ही जुड़े हॉकी प्रेमी, पीटीआई व एम्पायर मस्तान सिंह और जुड़वां भाई नसीब सिंह के चर्चे भी खूब हैं। हॉकी के अलावा मस्तान लोकप्रिय कार्टूनिस्ट भी हैं। विविध स्थापित पत्र-पत्रिकाओं को उनके इस हुनर ने खूब नवाजा।

मस्तान सिंह के नेतृत्व में प्रशिक्षक के रूप में एनपीएस स्कूल हनुमानगढ़ ने सीबीएसई वेस्ट जोन अंडर 14 हॉकी प्रतियोगिता में तीन गोल्ड मेडल (बॉयज व गल्र्स) जीते। साथ ही राष्ट्रीय स्तर पर दो बार कांस्य पदक भी जीते।

Hockey in Hanumangarh में राष्ट्रीय खिलाड़ी एनआईएस कोच इकबाल सिंह ढिल्लो, हॉकी प्रेमी श्योपत सिंह का योगदान भी सराहनीय है। हनुमानगढ़ को आज हॉकी का गढ़ कहा जाता है तो वजह इस जमीं से जुड़े खिलाडिय़ों, प्रशिक्षकों, हॉकी लवर्स का दमखम ही है।

Hockey in Hanumangarh

एस्ट्रोटर्फ आए…बात बन जाए!

Hockey in Hanumangarh जिले का खेल तय होने के बाद यहां एस्ट्रोटर्फ (कृत्रिम मैदान) की चाहत पुख्ता हुई है। साढ़े नौ करोड़ रुपए की लागत से एस्ट्रोटर्फ लगाने व खिलाडिय़ों को वाजिब सुविधाएं प्रदान करने की मांग पर सैद्धांतिक सहमति बनी है। जिला खेल विभाग के प्रस्ताव को मंजूरी देकर राज्य क्रीड़ा परिषद ने खेलो इंडिया को भेज दिया है।

दर्शन Positive Connect को बताते हैं कि एस्ट्रोटर्फ लगाने के प्रस्ताव पर राज्य क्रीड़ा परिषद ने सहमति रखते इसे केन्द्र सरकार के खेलो इंडिया नई दिल्ली को भेज दिया है। प्रदेश के 4 मैदानों में एस्ट्रोटर्फ बन चुके हैं, जिससे वहां के खिलाडिय़ों में जबरदस्त सुधार देखने को मिलता है।

भविष्य का हॉकी हब

एस्ट्रोटर्फ लगने पर हनुमानगढ़ राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं का हब बन सकता है।

एस्ट्रोटर्फ के लाभ

इससे हॉकी मैदान को एक समतल और सुखद सतह मिलती है। गेंद का उछाल और खिलाडिय़ों की गति नियंत्रित रहती है। मौसम की हर मार से अछूता है और प्राकृतिक घास की तुलना में अधिक टिकाऊ है। खिलाडिय़ों को चोट लगने का जोखिम कम रहता है।

जिले के अन्य नामचीन हॉकी सितारे

तेजेन्द्रपाल सिंह (अन्तर्राष्ट्रीय खिलाड़ी)

अरविन्द पाल सिंह (राष्ट्रीय खिलाड़ी)

इकबाल सिंह ढिल्लो (एनआईएस कोच)

नरेश यादव (अन्तर्राष्ट्रीय खिलाड़ी)

शैलेन्द्र शर्मा (राष्ट्रीय खिलाड़ी, रेलवे)

नरेन्द्रपाल सिंह (विश्वविद्यालय खिलाड़ी)

भागीरथ (विश्वविद्यालय खिलाड़ी)

निर्मल सिंह (राज्य स्तरीय खिलाड़ी)

राकेश बेनीवाल (राष्ट्रीय खिलाड़ी)

भूपेन्द्र सिंह (राष्ट्रीय खिलाड़ी)

गुरदीप सिंह (विश्वविद्यालय खिलाड़ी)

गुरदीप सिंह सीनियर (विश्वविद्यालय खिलाड़ी)

जेडी पठान (राष्ट्रीय खिलाड़ी)

जयद्रथ भाटी (विश्वविद्यालय खिलाड़ी)

महावीर सिंह (विश्वविद्यालय खिलाड़ी)

परमजीत सिंह (राष्ट्रीय खिलाड़ी)

राजेन्द्र सिंह (विश्वविद्यालय खिलाड़ी)

संजय कुमार (विश्वविद्यालय खिलाड़ी)

हरजिंदर सिंह (राष्ट्रीय खिलाड़ी)

शक्ति सिंह (विश्वविद्यालय खिलाड़ी)

सुनील बिहाणी (विश्वविद्यालय खिलाड़ी)

सुनील कुमार (विश्वविद्यालय खिलाड़ी)

राजपाल ढाका (विश्वविद्यालय खिलाड़ी)

मनजोत सिंह (राष्ट्रीय खिलाड़ी)

विशाल शर्मा (राष्ट्रीय खिलाड़ी)

सुखदेव सिंह (विश्वविद्यालय खिलाड़ी)

गौरव भारद्वाज (राष्ट्रीय खिलाड़ी)

दिग्विजय सिंह (राष्ट्रीय खिलाड़ी)

अमरजीत गोदारा (विश्वविद्यालय खिलाड़ी)

अश्फाक खान (विश्वविद्यालय खिलाड़ी)

गुरमेल सिंह (विश्वविद्यालय खिलाड़ी)

मान सिंह (विश्वविद्यालय खिलाड़ी)

मनीष कुमार शर्मा (विश्वविद्यालय खिलाड़ी)

विपुल गर्ग (जूनियर नेशनल)

करणजोत सिंह (सीनियर नेशनल)

हरवीर सिंह (सीनियर नेशनल)

मुकेश शर्मा (सीनियर नेशनल)

सीताराम (सीनियर नेशनल)

राजपाल सिंह (सीनियर नेशनल)

हिमांशु शर्मा (जूनियर नेशनल)

गुलाब भदरा (सीनियर नेशनल)

सुखप्रीत कौर (जूनियर/सीनियर स्कूल)

अशमीत सिंह (जूनियर स्कूल)

सतवीर कौर (सीनियर नेशनल स्कूल)

नेहा (जूनियर नेशनल स्कूल)

कल्पना (जूनियर नेशनल स्कूल)

कमलप्रीत (सीनियर/ जूनियर स्कूल)

दानिश (जूनियर नेशनल स्कूल)

जावेद (जूनियर नेशनल)

पंकज गोदारा (जूनियर नेशनल)

राहुल गोदारा (जूनियर नेशनल)

निशांत कौशिक (सब जूनियर नेशनल)

निधि (सीनियर नेशनल)।