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एक पहल

Girls Education : मजदूरी से फीस जुटा कॉलेज पहुंची 12 स्टूडेंट

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Girls Education राजस्थान के अलवर में Girls Education को बढ़ावा देने के लिए समर्पित एमिड (AMIED) संस्था ने कई साल पहले आर्थिक मजबूरियों के कारण पढ़ाई छोड़ चुकी 12 किशोरियों को फिर से शिक्षा से जोडकऱ कॉलेज पहुंचाया। शिक्षा के प्रति अपने मजबूत इरादों से इच्छा पूरी करने के लिए किशोरियों ने खेतों में मजदूरी तक की। इस तरह फीस जुटाकर वे अपने पढऩे के सपने को साकार करने में जुटी हैं। मेवात की किशोरियों की लगन और जज्बे की प्रेरक कहानी

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Girls Education आर्थिक संकट भी नहीं रोक पाया राह 

अलवर (राजस्थान)। राजस्थान में अनेक बालिकाएं आर्थिक संकट के आगे पढ़ाई छोडऩे को मजबूर हैं, लेकिन मेवात में Girls Education के प्रति मजबूत इरादों के आगे आर्थिक संकट भी बालिकाओं की राह नहीं रोक पाया, हालांकि उनकी पढ़ाई में कुछ साल का अंतराल जरूर आ गया।

मेवात में ज्यादातर परिवारों में Girls Education नहीं दिला पाने का कारण उनकी आर्थिक मजबूरी के साथ सामाजिक डर भी है। दूरस्त गांवों में 8वीं से आगे की पढ़ाई के लिए स्कूल नहीं होना भी एक कारण है।

खत्म नहीं होने दी पढऩे की इच्छा 

मेवात में कई बालिकाओं को ऐसे ही कारणों से अपनी पढ़ाई छोडऩे का मजबूर होना पड़ा, लेकिन पढ़़ऩ़े की अपनी इच्छा को खत्म नहीं होने दिया। इन्होंने Girls Education छोडकऱ घर का कामकाज तो संभाला ही, अपनी पढ़ाई के लिए जरूरी फीस मजदूरी करके जुटाई।

पढ़ाई की राह खुली, आत्मविश्वास बढ़ा

फीस का बंदोबस्त होते ही परिवार वालों को राजी किया और ओपन बोर्ड से 12वीं पास करके जा पहुंची कॉलेज, जहां अब वे नियमित पढऩे जा रही हैं। मजूदरी कर फीस जुटाने से उनकी पढ़ाई की राह ही नहीं खुली, बल्कि आत्मविश्वास भी बढ़ा है और वे शिक्षिका बनकर Girls Education को बढ़ाना चाहती हैं।

राह आसान बनाने में एमिड का योगदान

इन बालिकाओं की राह को आसान बनाने में एमिड संस्था का बड़ा योगदान है। एमिड की टीम के सदस्यों ने Girls Education के प्रति इन बालिकाओं के माता-पिता को जागरूक किया, बल्कि जरूरत पडऩे पर बालिकाओं के लिए स्कोलरशिप दी और उनका कॉलेज में दाखिला कराने में भी सहयोग किया।

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सामाजिक डर और जागरूकता की कमी

ककराली गांव के मजदूर अख्तर की बेटी मुस्कान ने 4 साल पहले 10वीं तक पढ़ाई की और फिर पढ़ाई छोड़ दी। इससे आगे उनके गांव में स्कूूल नहीं था। ऐसे में घर वाले सामाजिक डर और Girls Education के प्रति जागरूकता की कमी के कारण मुस्कान को पढऩे के लिए दूसरे गांव नहीं भेजना चाहते थे। घर के आर्थिक हालात भी ज्यादा अच्छे नहीं थे।

पढ़ाने के लिए ऐसे हुए रजामंद

मुस्कान पॉजिटिव कनेक्ट को बताती है कि उसकी पढऩे की इच्छा खूब थी, लेकिन एक बार उसे भी हालात के आगे मजबूर होकर पढ़ाई छोडऩी पड़ी। वह बताती है कि एमिड की टीम ने माता हनसीरा और पिता अख्तर को Girls Education के बारे में समझाया तो वे पढ़ाने को राजी हो गए।

दिहाड़ी मजदूरी कर खेतों में लगाई प्याज 

मुस्कान बताती है कि उसने ओपन बोर्ड से 52 फीसदी अंकों के साथ 12वीं पास की। इससे उसकी इच्छा को बल मिला। Girls Education के प्रति समर्पित मुस्कान ने जरूरत पडऩे पर दिहाड़ी मजदूरी कर खेतों में प्याज भी लगाई। इस तरह उसने कॉलेज की फीस का इंतजाम किया। मुस्कान अब पढऩे के लिए नियमित कॉलेज जाती है।

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चाहकर भी पढ़ाई जारी नहीं रख पाई ज्योति

घेघोली गांव की ज्योति को पढ़ाई छोड़े 3 साल हो गए। उसके पिता रोहिताश मजदूरी करते हैं। मां सुमित्रा ग्रहणी है। उसके परिवार वाले भी आर्थिक कारणों और Girls Education के प्रति जागरूकता की कमी से ज्योति की पढ़ाई रोकने को मजबूर हुए। हालांकि ज्योति पढऩा चाहती थी, लेकिन चाहकर भी तब पढ़ाई जारी नहीं रख पाई।

फीस का इंतजाम खेतों में मजदूरी से

गांव में एक बार एमिड की टीम आई तो उनके सदस्यों ने ज्योति के माता-पिता को Girls Education के बारे में समझाया और ज्योति को आगे की पढ़ाई करने देने के लिए मना लिया।

ज्योति ने 12वीं ओपन बोर्ड से 55 प्रतिशत अंकों से पास की। ज्योति ने कॉलेज की पढ़ाई के लिए फीस का इंतजाम खेतों में मजदूरी करके किया। उसने प्याजों के खेत में काम किया। ज्योति अब बीए पार्ट प्रथम में पढ़ रही है।

प्याज के खेतों में मजदूरी की आरती ने

देसूला गांव की आरती ने भी 3 साल पहले 10वीं करने के बाद के बाद पढ़ाई छोड़ दी। उसने भी ओपन बोर्ड से 12वीं 50 फीसदी अंकों से पास की। आर्थिक मजबूरी में आरती ने प्याज के खेतों में मजदूरी की और फीस के पैसे जुटाए। Girls Education के प्रति समर्पित आरती भी अब नियमित कॉलेज जा रही है।

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गांव से दूर नहीं जा सकी पढऩे

बलवण्डका गांव की अंजली के पिता महावीर मजदूरी करते हैं। मां ललिता ग्रहणी है। 10वीं से आगे की पढ़ाई के लिए 3 किलोमीटर दूर दूसरे गांव में जाना पड़ता। Girls Education के प्रति जागरूकता की कमी के चलते 4 साल पहले घर वालों ने पढ़ाई ही छुड़वा दी। एमिड टीम के प्रयासों से अंजली ने ओपन बोर्ड से 12वीं 50 फीसदी अंकों से पास की।

प्याज लगाकर भरी कॉलेज की फीस

पॉजिटिव कनेक्ट से बातचीत में अंजली बताती है कि अन्य गांव वालों की तरह उसके माता-पिता भी कपास चुनने पंजाब जाते हैं। गांव के ज्यादातर ग्रामीण ऐसी ही मजदूरी पंजाब जाते हैं तो पूरा गांव खाली हो जाता है।

अंजली ने अपनी पढ़ाई की इच्छा को मन में संयोए रखा और मौका लगते ही उसने प्याज लगाकर व मजदूरी करके पैसे जुटाए और कॉलेज की फीस भरी। Girls Education के प्रति समर्पित अंजली भी अब अन्य बालिकाओं की भांति पढऩे के लिए कॉलेज जाती है।

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10-12 बालिकाओं को कॉलेज से जोड़ा

एमिड की शैक्षिक समन्वयक पूनम गुप्ता बताती हैं कि मेवात में ऐसी बालिकाओं की संख्या खूब है, जो गांव में स्कूल नहीं होने या फिर परिवार की आर्थिक हालत ठीक नहीं होने के कारण बीच में पढ़ाई छोडऩे को मजबूर हुई हैं।

पॉजिटिव कनेक्ट को पूनम बताती हैं कि एमिड की टीम ने ऐसी ड्रॉपआउट बालिकाओं का सर्वे कराया और उनके परिजनों से सम्पर्क साधा।बालिकाओं के माता-पिता को Girls Education का महत्व बताया। एमिड मेवात में ऐसी 10-12 बालिकाओं को कॉलेज से जोड़ा है।

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